'शेक्सपियर ब्रिटेन से ज़्यादा भारत में हिट'

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अंग्रेज़ी के मशहूर कवि और नाटककार शेक्सपियर को साहित्य और थियेटर प्रेमियों और आम आदमियों से भी इस क़दर प्यार मिला है कि उनकी लिखी लाइनें लोगों की ज़ुबान पर रहती हैं.

कई हिंदी फ़िल्में उनके नाटकों से प्रेरित रहीं हैं.

हाल में किए गए सर्वे में पता चला है कि शेक्सिपियर अपने देश ब्रिटेन से अधिक भारत में पसंद किए जाते हैं.

आज शेक्सपियर की 400वीं पुण्यतिथि है. इस मौक़े पर भारत की मीडिया ने उन्हें अलग अलग अंदाज़ में, लेकिन बहुत स्नेह से याद किया.

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भारत के अंग्रेज़ों और बेहद प्रतिष्ठित अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने अपने पाठकों की जानकारी को जांचने के लिए पहले पन्ने पर सवाल-जवाब आयोजित किया है, 'अपने शेक्सपियर को जानिए'.

वहीं एक और जाने माने अंग्रेज़ों अख़बार द टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है, “भारत के लोग शेक्सपियर के नाटक रोमियो-जूलियट के दीवाने हैं. अब कोहिनूर नहीं मिला तो बदले में शेक्सपियर ही सही.”

अख़बार अपने संपादकीय में बताता है कि क्यों भारत के लोग शेक्सपियर से ज़्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं.

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संपादकीय में कहा गया है, “भारत में सामंती परंपराएं, जाति की दीवारें, ऑनर कीलिंग, दबंग माता-पिता, परस्पर विरोधी परिवार, खाप पंचायतें हैं. यहां क्लियोपेट्रा, ओथेलो, रोमियो और जूलियट सभी किरदार देखने को मिल जाते हैं. क्योंकि यहां निःसंदेह प्यार के लिए मर जाना या मार देना एक प्रिय दुख है.”

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाने वाले मोहम्मद असीम सिद्दिक़ी अंग्रेज़ी अख़बार हिंदू में लिखते हैं, “भारतीय विद्वान और अकादमिक संस्थानों ने शेक्सपियर के नाम और काम को ज़िंदा रखने में अहम भूमिका निभाई है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अंग्रेज़ी विभाग उनमें से एक है.”

डीएनए अख़बार कहता है: “आज विलियम शेक्सपियर केवल नाटककार और कवि मात्र नहीं है. आज उन्हें आधुनिक अंग्रेज़ी के निर्माता के रूप में याद किया जाता है.”

डेक्कन हेराल्ड ने लिखा: “वे एक ऐसे क़लमकार हैं जिन्होंने अपने जन्म के 4 सदी बाद भी पाठकों और अभिनेताओं को अपने आकर्षण में बांधे रखा है. 16वीं सदी का ऐसा लेखक जिसके जुमलों का आधुनिक संवाद और चर्चा में बार-बार प्रयोग किया जाता है.”

पुणे में इस मौक़े पर फ़िल्म फ़ेस्टिवल का आयोजन किया गया है. 'शेक्सपियर ऑन स्क्रीन' फेस्टिवल में उनके नाटक पर बनी 9 फ़िल्मों को दिखाया जाएगा.

अख़बारों से निकलकर यदि बॉलीवुड फ़िल्मों की ओर देखें तो पाएंगे कि यहां भी शेक्सपियर छाए हुए हैं. जाने माने फिल्मकार विशाल भारद्वाज शेक्सपियर की लेखनी से काफ़ी प्रेरित हैं. विशाल ने अपनी कई फ़िल्मों में शेक्सपियर के किरदारों को उतारा है. जैसे ओंकारा में ओथैलो, मक़बूल में मैकबेथ और हैदर में हैमलेट का किरदार.

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मिंट वेबसाइट स्ट्रैटफोर्ड-अपॉन-एवन में शेक्सपियर के घर की तस्वीरों की एक स्लाइड शो चला रही है. "घर में शेक्सपियर के साथ."

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