जब रो पड़े भारत के मुख्य न्यायाधीश

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भारतीय के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर रविवार को देश में जजों की समस्या पर बोलते हुए भावुक हो गए.

वो दिल्ली में मुख्यमंत्रियों और राज्यों को मुख्य न्यायाधीशों की बैठक में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग भारत में आए और मेक इन इंडिया में शामिल हों, यहां निवेश करें. लेकिन हम जिन लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं, वो लोग ये भी देखेंगे कि इस निवेश के मामले में पैदा होने वाले विवादों ने निपटने के लिए यहां की न्यायपालिका कितनी सक्षम है."

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "न्यायपालिका की क्षमता और देश के विकास के बीच गहरा नाता है."

जजों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर भावुक होते हुए उन्होंने कहा, "ये सिर्फ़ याचिकाकर्ता... बेचारे याचिकाकर्ता और जेलों में पड़े लोगों के लिए नहीं है, बल्कि इस देश के विकास और प्रगति के लिए भी बहुत ज़रूरी है."

जस्टिस ठाकुर ने कहा, "सिर्फ़ आलोचना करने से काम नहीं चलेगा. आप सारा बोझ न्यायपालिका पर नहीं डाल सकते हैं. अगर आप भारत के जजों के काम की तुलना अन्य देशों से करेंगे, तो हम उनसे बहुत आगे हैं."

उन्होंने कहा कि पूरी अमरीकी सुप्रीम कोर्ट हर साल 81 मामलों पर फैसले देती है, वहीं भारत में एक जज औसतन 2600 मामलों पर फैसले देता है, भले वो मुंसिफ हो या फिर सुप्रीम कोर्ट का जज.

उन्होंने कहा, "कांफ्रेंस और सेमिनारों में बहुत चर्चा होती है, लेकिन कुछ होता नहीं है. केंद्र सरकार कहती है कि वो इस बारे में वचनबद्ध है, लेकिन ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. राज्य सरकार कहती है कि केंद्र सरकार को फंड देने दीजिए."

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