'द नेशन वॉंट्स टू नो'- कौन हैं ये?

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आंखों पर चश्मा चढ़ाए टीवी के एक मशहूर समाचार प्रस्तोता और उनका तल्ख़ स्टाइल जितना चर्चा में रहा है उससे कम दिलचस्प नहीं रहा उनकी नकल उतारने वाले ‘बेयरली स्पीकिंग’ शो पेश करने वाले कलाकार का टशन.

अगर इंटरनेट पर वीडियो देखने से आपको परहेज़ नहीं है तो द वायरल फ़ीवर यानी टीवीएफ़ के यूट्यूब चैनल की पेशकश बेयरली स्पीकिंग विद अरनब के ऐंकर और उनके मेहमानों से आपका वास्ता ना पड़ा हो इसकी संभावना कम है.

आज टीवीएफ़ भारत में सबसे ज़्यादा दर्शक बटोरने वाले यूट्यूब चैनलों में दूसरे नंबर पर है.

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Image caption 'बेयरली स्पीकिंग विद अरनब' के दो पसंदीदा किरदार

ऐंकर के तौर पर जिन्हें आप देखते हैं वो हैं बिस्वपति सरकार जिन्हे दफ़्तर में सब प्यार से बिस्सू कहते हैं और दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने वाले अभिनेता हैं जितेंद्र कुमार.

ये दोनों ही आईआईटी से पढ़े इंजीनियर हैं. इस कार्यक्रम को बनाने का ज़िक्र छिड़ने पर बिस्वपति बताते हैं कि ‘‘ये पहले से तय नहीं था कि मैं ये किरदार निभाउंगा. मैं तो सिर्फ़ सीरीज़ लिख रहा था. जब उसे सुनाने का वक्त आया तो मैं बहुत सहज रूप से अरनब की तरह ही बोलता जा रहा था तो सबने कहा कि मुझे ही करना चाहिए. तब कहां पता था कि ये इतना पसंद आ जाएगा.’’

इस चैनल के सीईओ अरुणाभ कुमार से मुलाक़ात हुई. आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते करते दिमाग़ वीडियो प्रोडक्शन की तरफ़ कैसे चला गया?

इस सवाल के जवाब में अरुणाभ कहते हैं कि मुझे पता चल गया था कि मैं अच्छा इंजीनियर नहीं बन सकता. हर सेमेस्टर में मुझे नया करियर आयडिया आता था. मैने कॉलेज की ड्रैमैटिक सोसायटी के लिए कुछ वीडियोज़ बनाने का काम किया और तीसरे सेमेस्टर में मुझे लगने लगा कि कहानियां कहना, वीडियो और फ़िल्में बनाने जैसी चीज़ो में आगे बढ़ा जा सकता है. कोशिश अब भी जारी है.''

Image caption जितेंद्र कुमार और बिस्वपति सरकार जिनकी पहचान टीवी प्रस्तोता के तौर पर है.

टीवीएफ़ सिर्फ़ यूट्यूब वीडियो बनाने वाली कंपनी नहीं है. ये टीवीएफ़ मीडिया लैब्स का हिस्सा है जो कई तरह का वीडियो और टीवी प्रोडक्शन भी करती है. ऑनलाइन कंटेट डालने की शुरूआत भी सिर्फ़ इसी वजह से हुई क्योंकि अरुणाभ अपना जो आइडिया एक बड़े टीवी चैनल को बेचना चाहते थे उसने कहा कि भारतीय ऑडियंस इसके लिए तैयार नहीं है.

टीवीएफ़ लगातार कई वेब सीरीज़ और स्केच यानी शख़्सियत आधारित कॉमेडी शो बना रहा है जिन्हें देखने वालों की संख्या लाखों में है. नज़रों में हमेशा रहती है युवा ऑडियंस और रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हुए मसले. इस चैनल की एक लोकप्रिय सीरीज़ पर्मानेंट रूममेट्स के मुख्य कलाकार सुमित व्यास कहते हैं कि युवाओं की बात जब भी होती है उन्हें मूर्ख समझा जाता है. हम उन्हें मूर्ख मानकर नहीं चल रहे हैं. युवा बहुत संजीदा हैं. हमारे शो पर सारे मसले वहीं हैं जो हर दिन लोगों के साथ होते हैं या हो सकते हैं.''

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इसी सीरीज़ की मुख्य अभिनेत्री निधि मानती हैं कि ‘’हमारे चैनल की सबसे बड़ी ताक़त यही है कि जो भी बनाया जा रहा है वो सच के बहुत क़रीब है. जो भावनाएं आप आम जिंदगी में महसूस करते हैं वो सब हमारे चैनल के सीरीज़ में आपको दिखाई देंगी.इसी से लोग जुड़ पाते हैं.’’

यूट्यूब के खुले मंच पर अब बहुत खिलाड़ी हैं. इसका मतलब है कि सफलता को बरक़रार रखने के लिए हर बार क्लिक करने और करवाने वाला आयडिया चाहिए. उससे भी ज़्यादा कारगर लिखने वाले चाहिए.

टीम की युवा लेखिका निषाद को लगता है कि ‘‘किसी भी तरह के ऑनलाइन कंटेंट में मौलिकता ही सबसे ज़्यादा अहम है. उसमें नयापन और आम ज़िंदगी से जुड़ाव होना चाहिए, कुछ ऐसा सटीक होना चाहिए जो देखने वाले को सीधे छू जाए.’’

हर वो शख़्स जो यूट्यूब पर सफल होना चाहता है उसके लिए ये सवाल अहम है कि आख़िर इस माध्यम से कमाई किस तरह से होती है.

अपना अनुभव बांटते हुए अरुणाभ कुमार कहते हैं ''मैं शुरूआत में पैसे बचाता रहा और लगभग ढाई साल तक हमने उसी पैसे से वीडियो बनाए. बाद में जब आपके वीडियो पर क्लिक की संख्या बढ़ने लगती है तब यूट्यूब का एक रेवेन्यू साझेदारी का मॉडल है जिसके आधार पर आपको पैसे मिलने लगते है. लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं होता. प्रक्रिया बहुत धीमी रहती है.''

एक और बात जो इन्हें भीड़ से अलग कर देती है वो ये कि हाल ही में एक बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनी ने टीवीएफ़ में क़रीब 66 करोड़ रुपए का निवेश किया है.