लू से झुलसते उत्तर भारत के लिए आशा की किरण

heatwave

तापमान ऐसा जैसे आसमान से आग बरस रहा हो, सूखा ऐसा कि ज़मीन में गहरी दरारें पड़ गई हों. नल और कुंए बिलकुल सूखे. इन दिनों भारत के अनेक राज्यों के हालात ऐसे ही हैं. लू और भीषण गर्मी से पिछले हफ्ते तक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है.

राजधानी दिल्ली में 2 मई की दोपहर तक तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका था. लेकिन भारत में कई जगहों पर तापमान इससे भी कहीं अधिक रिकॉर्ड किया गया है.

एक मई को नागपुर में पारा 45.3 डिग्री सेलसियस तक पहुँच गया. तेलंगाना के गुंटूर और कुछ दूसरे शहरों में भी तापमान 45 डिग्री दर्ज किया गया. तेलंगाना के मौसम विभाग के अध्यक्ष वाईके रेड्डी के अनुसार ये इलाके कई दिनों से लू की चपेट में हैं.

पिछले हफ्ते तक तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में गर्मी से मरने वालों की संख्या 140 से अधिक थी.

इस दौरान छत्तीसगढ़ में भी लू से चार लोगों की मौत हुई है. बिलासपुर, सुकमा, रायगढ़ और रायपुर ज़िलों में हज़ारों की संख्या में लोग लू के शिकार होकर अस्पतालों में पहुंचे हैं.

छत्तीसगढ़ में गर्मी चरम पर है. मार्च के महीने में ही राज्य के कई इलाकों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया था और अप्रैल की शुरुआत में ही बिलासपुर जैसे शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के तमाम जिलोंं में पारा 40 डिग्री सेल्शियस से ऊपर बना हुआ है. कोलकाता तो दो दशकों में लू का सबसे लंबा दौर झेल रहा है. राज्य के पूर्व मेदिनीपुर और कूचबिहार जिलों में पांच मई को होने वाले मतदान से पहले उम्मीदवारों को जमकर पसीना बहाना पड़ रहा है.

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नागपुर में गर्मी और धूप को देखते हुए महानगर पालिका की तरफ से शहर के कुछ व्यस्ततम चौराहों पर हरे रंग के जालीदार शेड्स लगाए गए हैं.

इस कदम का शहर के लोगों ने स्वागत किया है. 60 वर्षीय राम अजमेरी इसे अच्छी पहल बताते हैं. वो कहते हैं, "इतने वर्षों से गर्मियों में नागपुर का तापमान बेतहाशा बढ़ता रहा है लेकिन संतोष इस बात का है कि पहली बार महापालिका प्रशासन ने लोगों की कुछ सुध ली है."

27 वर्षीय अमोल कितालिकर मोटरबाइक चलाते हैं और हेलमेट पहनना अनिवार्य होने के कारण परेशान हैं. वो कहते हैं कि इन परिस्थितियों में इन शेड्स से कुछ राहत मिलती है.

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उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड और ओडिशा में भी लू और गरम हवा से आम लोगों के जीवन पर असर पड़ा है. कई जगहों पर कुँए का पानी सूख गया है.

बिहार पूरे अप्रैल के महीने में गर्मी की चपेट में रहा. मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक आशीष कुमार सेन ने बीबीसी को बताया कि पटना में अप्रैल का महीना 1980 से अब तक का सब से गरम साबित हुआ.

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खुशखबरी ये है कि कई जगहों पर गर्मी से राहत के आसार नज़र आना शुरू हो गए हैं.

पटना में दो मई को तापमान 35 डिग्री रिकॉर्ड किया गया जो पिछले दिनों के मुक़ाबले पांच डिग्री कम था. पश्चिमी बंगाल में बारिश की भविष्यवाणी की गई है. मौसम विभाग ने कहा है कि दो दिनों तक इस गर्मी और लू से राहत नहीं हैं लेकिन उसके बाद इस सप्ताह भारी बारिश और चक्रवाती तूफान की भविष्यवाणी की गई है.

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कोलकाता में मौसम विभाग के निदेशक जीसी जेवनाथ कहते हैं, ‘अभी कम से कम दो दिनों तक गर्मी से राहत की उम्मीद कम ही है. उसके बाद बारिश के आसार बन रहे हैं.’

नागपुर से मिल रही ख़बरों के अनुसार विदर्भ में भी अगले कुछ दिनों में बारिश हो सकती है. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों में बारिश का अनुमान लगाया जा रहा है.

(ये रिपोर्ट तैयार की गयी बंगलुरु से इमरान कुरैशी, छत्तीसगढ़ से अलोक पुतुल, नागपुर से संजय तिवारी और कोलकाता से पीएम तिवारी के सहयोग से)

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