भारतीय विमान क्यों हैं वायसरॉय टेरेटॉरी का हिस्सा

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आज़ादी के 68 साल बाद भारत में कई जगहों के नाम, सड़कों के नाम यहां तक की प्लानिंग कमीशन का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया गया है.

अभी हाल ही में गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम कर दिया गया. नई दिल्ली के औरंगज़ेब रोड का नाम बदलकर डॉक्टर ऐपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया गया.

लेकिन अंग्रेजी शासनकाल की एक चीज़ आज भी नहीं बदली और वो है हवाई जहाज की राष्ट्रीयता बताने वाला कोड 'वीटी' यानी 'वायसरॉय टेरेटॉरी'.

बीजेपी सांसद तरुण विजय ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए इसे बदलने की मांग की.

तरुण विजय ने कहा, "वीटी कोड ब्रिटिश शासनकाल का प्रतिबिंब है. हिंदुस्तान, वायसरॉय का क्षेत्र नहीं हो सकता. इसलिए इस कोड को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है."

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उन्होंने मांग की कि पिछले सरकारों का इस कोड को नहीं बदलने के फ़ैसले में संशोधन किया जाए.

जहां दुनिया के छोटे-छोटे देश तक इस कोड को बदल चुके हैं, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गर्व करने वाला भारत अभी भी पूरी तरह से इस मानसिकता से उबर नहीं पाया है.

विजय के मुताबिक 'वीटी' जो 'वायसरॉय टेरेटॉरी' को दर्शाता है उसे किसी भारतीय कोड के साथ बदलना चाहिए.

उन्होंने कहा, "भारत में जहां सड़कों और स्थानों के नाम बदल दिए गए हैं, वहां भारतीय हवाई जहाजो में 'वीटी' कोड का इस्तेमाल होना दुखदाई है."

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उन्होंने कहा, "फिजी, नेपाल और पाकिस्तान जैेसे देश पहले ही इस कोड को बदल चुके हैं जबकि भारत ने अब तक ऐसा नहीं किया गया."

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन के नियमों के मुताबिक़ हर हवाई जहाज को उनके अपने देश में पंजीकृत कराना पड़ता है, जहां उन्हें पंजीकरण संख्या दी जाती है. इसमें दो अक्षरों वाला देश का कोड भी शामिल होता है.

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