अनपढ़ कश्मीरी दादा का आईएएस टॉपर पोता

  • 11 मई 2016
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आईएएस मेरिट लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहे अतहर आमिर खान ने अपनी सफलता और भावी लक्ष्यों के बारे में बीबीसी से बातचीत की.

मैं बहुत खुश हूं और मुझे लगता है कि ये बहुत बड़ा अवसर है, बहुत बड़ी जवाबदेही भी है एक सिविल सर्वेंट के रूप में.

अतहर आमिर से बातचीत सुनने के लिए क्लिक करें

रैंक की वजह से और अधिक जवाबदेही भी आई है. मेरे लिए तो इसके मायने यहीं है कि ये एक दरवाजा है.

मेरी एक सिविल सर्वेंट के तौर पर एक लंबी यात्रा अब शुरू होने वाली है. ये बस एक पहला पड़ाव है.

असली इम्तहान और असली उपलब्धि तब होगी जब मैं एक अच्छा सिविल सर्वेंट बनकर दिखाऊं.

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पिछले साल मुझे 560 रैंक मिला था, जिससे मुझे इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस मिला था, लेकिन मेरा खुद का सपना था कि मैं एक आइएएस बनूँ इसलिए फिर से परीक्षा दी.

मुझे ऐसा नहीं लगा था कि सेकेंड रैंक मिलेगी. आश्वस्त तो नहीं था लेकिन ये उम्मीद थी कि बीते साल की तुलना में अच्छा रिजल्ट होगा.

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मुख्य लक्ष्य यो यही है कि सिविल सर्विस जो अब हम ज्वाइन करने वाले हैं उस सर्विस में अपने दिलोजान से मेहनत करे. काम करें और कुछ बदलाव, कुछ चेंज, कुछ डिफरेंस हम भी लोगों के लिए लेकर आएं.

मेरे साथ तो मेरे घर वालों का सपोर्ट उनके अरमान उनके ड्रीम्स थे, मैं सोचता हूं मेरे लिए वही सबसे बड़ी प्रेरणा रहीं.

मेरे दादाजी का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा. वो पढ़े-लिखे नहीं है. उन्होंने पढ़े--लिखे न होने के बावजूद मेरे पापा के लिए अच्छी तालीम का बंदोबस्त किया. इसके बाद मेरी शिक्षा में भी उनका काफी योगदान रहा.

मुझे याद है कि वो मेरे स्कूल आया करते थे, मेरी टीचर से पूछा करते थे कैसा पढ़ रहा है. वो खुद भी काफी मेहनत किया करते थे. उनसे काफी हद तक प्रेरणा मिली मुझे.

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