प्यास बुझाए बिना लौट गई ‘वाटर ट्रेन’

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जल संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के मक़सद से झांसी पहुंची ट्रेन चार दिन खड़ी रहने के बाद आख़िरकार वापस लौट आई.

रेलवे के झांसी मंडल के डीसीएम गिरीश कंचन ने बताया कि ट्रेन के डिब्बों में जो भी पानी था उसे ख़ाली करा लिया गया है. इस पानी का इस्तेमाल रेलवे अपने लिए करेगा.

बुंदेलखंड के लिए रतलाम से 10 बोगियों वाली ट्रेन आई थी. लेकिन इससे फ़ायदा तो किसी को नहीं हुआ लेकिन जम कर सियासत ज़रूर हुई. बताया ये भी जा रहा है कि ट्रेन के आने और यहां चार दिन तक खड़ी रहने के दौरान कम से कम दस लाख रुपये का ख़र्च आया है.

हालांकि रेलवे के डीसीएम गिरीश कंचन कहते हैं कि रेलवे ऐसे मामलों का हिसाब नहीं रखता है. उन्होंने बताया, “ये रेलवे के आंतरिक व्यापार का हिस्सा है. ज़रूरत पड़ने पर इन बोगियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा दिया जाता है. हमारे पास बड़ी संख्या में वैगन हैं, इस तरह से इनका हिसाब नहीं रखा जाता है.”

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वहीं जानकारों का कहना है कि ट्रेन लगभग 120 घंटे झांसी स्टेशन पर खड़ी रही. यदि निजी तौर पर ये ट्रेन मँगाई जाती तो गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के 9 घंटे बाद से प्रति घंटा 100 रुपए विलंब शुल्क लिया जाता है.

गिरीश कंचन भी स्वीकारते हैं कि निजी तौर पर जब पूरी ट्रेन बुक कराई जाती है तो स्टेशन पर खड़े रखने के लिए चार्ज किया जाता है.

यही नहीं, बताया जा रहा है कि ट्रेन के आने-जाने में कम से कम तीन लाख रुपये का डीज़ल ख़र्च हुआ होगा.

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस ट्रेन के पानी को ये कहते हुए लेने से मना कर दिया था कि बुंदेलखंड में पानी की इतनी ज़रूरत नहीं है कि उसे लातूर की तरह ट्रेन से पहुंचाया जाए.

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बाद में ये भी पता चला कि ट्रेन के टैंकरों में पानी ही नहीं है. झांसी के ज़िलाधिकारी अजय शुक्ल ने भी बीबीसी से बातचीत में इस बात की पुष्टि की थी.

सुर्खियों में रही इस ट्रेन को लेकर हो रही सियासत के बीच एक दुखद ख़बर भी आई जब ट्रेन की कवरेज करने गए एक फोटो जर्नलिस्‍ट की मौत हो गई.

झांसी के डीसीएम का कहना है कि ट्रेन को खड़े रखने में कोई परेशानी नहीं थी और न ही जगह की कमी थी क्योंकि यहां कम से कम दो सौ वैगन ख़ाली पड़े हुए हैं.

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वाटर ट्रेन को लेकर रेलवे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं और वो जल्द से जल्द इसे वापस भेजना चाह रहा था.

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दरअसल जब तक ये ट्रेन खड़ी थी, मीडिया में इसकी ख़ूब चर्चा हो ही रही थी. बड़ी संख्या में लोग इस ट्रेन के साथ सेल्फ़ी भी ले रहे थे.

रेलवे की पटरी पर खड़ी ट्रेन के साथ लोगों की सेल्फ़ी में बढ़ती दिलचस्पी रेलवे प्रशासन के लिए परेशानी की सबसे बड़ी वजह बन रही थी.

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