क्या केरल में भ्रष्टाचार पर लड़ा जाएगा चुनाव?

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केरल के वोटर हमेशा दो गठबंधनों को जिताते रहे हैं. पहला कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ़) और दूसरा एलडीएफ़. दोनों एक दूसरे को हराकर सत्ता में आते रहे हैं.

इस बार यूडीएफ़ के मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने इस ढर्रे से हटकर एक नया रास्ता बनाने की कोशिश में एक 'विकास योजना' पेश की है ताकि अपने पांच साल के प्रचलित तरीक़े को बदला जा सके.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक एमजी राधाकृष्णन कहते हैं, "अगर भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह ग़लत साबित हो जाएं तो यह एक अलग मुद्दा है. ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार घोटालों की वजह से यूडीएफ़ की छवि एक बेहद भ्रष्ट सरकार की बन गई है. इसके विकास केंद्रित सरकार होने के दावों के बावजूद भी."

डेक्कन क्रॉनिकल के कार्यकारी संपादक केजे जेकब कहते हैं, "इसकी छवि यह है कि इस सरकार में कुछ तो गड़बड़ है."

ये आरोप भ्रष्टाचार के छोटे मामलों से लेकर कुछ बड़े विवादों तक हैं. कई मंत्रियों के ख़िलाफ़ बहुत सारे आरोप लगाए गए हैं लेकिन मुख्य आरोप इस प्रकार हैं.

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1. पहला आरोप खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री अनूप जोसेफ़ पर लगाया गया था. मामले में सतर्कता विभाग की जांच चल रही है.

2. सौर घोटाला: यह घोटाला तब प्रकाश में आया जब विंडमिल आदि सौर ऊर्जा उपकरण के आपूर्तिकर्ताओं ने सरिता नायर के ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाया. पुलिस की जांच में पता चला कि उनके मंत्रियों और तो और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) तक अच्छे ख़ासे संपर्क हैं.

सरिता नायर के यह आरोप लगाने के बाद कि सीएमओ कार्यालय के एक अधिकारी ने 1.9 करोड़ रुपये नकद लिए हैं, तीन अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में हटा दिया गया. सरिता ने चांडी पर उनका यौन शोषण करने का आरोप भी लगाया था.

उनकी ग़लती यह थी कि उन्होंने अपने बयान बार-बार बदले, इतने ज़्यादा बदले कि एलडीएफ़ ने भी उन पर दांव खेलने से इनकार कर दिया. इसलिए इन चुनावों में सौर घोटाला कोई मुद्दा ही नहीं रहा. लेकिन यह भी एक हकीकत है कि राज्य के खजाने को कोई नुकसान नहीं हुआ है.

3. बार रिश्वत घोटाला: केरल ने राज्य में शराब पर चरणबद्ध ढंग से प्रतिबंध लगाना शुरू किया. पहले चरण में बार-कम-रेस्तरॉं पर शराब पर प्रतिबंध लगाया गया जिसमें फ़ाइव स्टार होटलों को छोड़ दिया गया.

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बार रेस्तरां एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाया कि मंत्री केएम मणि और के बाबू ने इस प्रतिबंध को उठाने के लिए रिश्वत की मांग की. यह मुद्दा इस स्तर तक पहुंचा कि कानूनी जंग के बीच दोनों मंत्रियों को इस्तीफ़ा देना पड़ा. इस बार भी सरकारी ख़ज़ाने को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा.

4. भ्रष्टाचार के इस माहौल के चलते भ्रष्टाचार के पुराने मामले भी उठाए जाने लगे. एक 1991 का पामालीन तेल आयात मामला था, तब चांडी वित्त मंत्री थे. तब सरकारी खज़ाने को हुआ घाटा 2.32 करोड़ रुपये था.

इसके अलावा लोकायुक्त के पास भ्रष्टाचार की 37 शिकायतें हैं जिनमें से किसी में भी एफ़आईआर दर्ज नहीं हुई है.

चुनाव आयोग के चुनाव की तारीख की घोषणा करने से कुछ दिन पहले ही राज्य के मंत्रिमडंल ने कई योजनाओं को मंज़ूरी दी. लेकिन राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष वीएम सुधीरन ने इनमें से कुछ की सार्वजनिक रूप से आलोचना की.

ये फ़ैसले धार्मिक समूहों और कॉर्पोरेट को भूमि आवंटन से जुड़े हुए थे और क़ानून के ख़िलाफ़ तो थे ही पारिस्थितिकी तंत्र को नुक़सान पहुंचाने वाले भी थे. सरकार ने अपने फ़ैसले वापस ले लिए.

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क्या इन मामलों से चुनाव परिणामों पर कोई असर पड़ेगा? राजनीतिक विश्लेषक राधाकृष्णन कहते हैं, "हो सकता है राज्य में सत्ता विरोधी रुझान को यूडीएफ़ की नकारात्मक छवि से ही बल मिलता है. लेकिन चांडी इससे यह कहकर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि एक भी आरोप साबित नहीं हुआ है और किसी ने भी विकास योजना लागू नहीं की है."

चांडी के विकास कार्यक्रम में कोचि मैट्रो रेल प्रोजेक्ट, कन्नूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट शामिल हैं.

हालांकि केजे जेकब कहते हैं, "यह चुनाव मुद्दों पर नहीं हो रहा है, चुनाव परिणाम तो जाति और संप्रदाय के आधार पर ही आएंगे."

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