'पिता की हत्या के बाद भी भाईचारे की बात कही'

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कनाडा में शुक्रवार को कार हादसे में मारे गए 'निरंकारी मिशन' के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह ने उस समय लोगों का भरोसा जीता था जब उन्होंने पिता की हत्या के बावजूद सिखों और निरंकारियों के बीच दुश्मनी ख़त्म करने और शांति बनाए रखने की बात की थी.

हरदेव सिंह के पिता बाबा गुरबचन सिंह की 24 अप्रैल 1980 को हत्या कर दी गई थी. तब हरदेव सिंह की उम्र महज़ 26 साल थी.

उनके पिता की हत्या के अभियुक्त भाई रंजीत सिंह को बाद में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त का प्रमुख बना दिया गया था.

मिशन के प्रवक्ता कृपा सागर कहते हैं, "बाबा गुरबचन सिंह की हत्या के बाद हरदेव सिंह ने एक भाषण में कहा कि बदले की भावना से सोचने की ज़रूरत नहीं है और हर हालत में शांति बनाए रखनी है."

दरअसल 13 अप्रैल 1978 को अमृतसर में निरंकारियों और सिखों के बीच हुई झड़प के बाद ही पंजाब में हिंसा की आग शुरू हुई थी जो डेढ़ दशक तक जलती रही थी.

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Image caption नरंकारी संत बाबा हरदेव सिंह, फ़ाईल फ़ोटो

निरंकारियों और सिखों की झड़प में अमृतसर में 16 लोगों की मौत हुई थी. मरने वाले 13 सिखों में दो चरमपंथी नेता जरनैल सिंह भिंडरवाले के समर्थक थे और तीन निरंकारी थे.

कई जानकारों का मानना है कि हरदेव सिंह ने सिख-निरंकारी दुश्मनी को सुलझाने और पंजाब में हालात सामान्य करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए थे.

कृपा सागर कहते हैं, "जब बाबा गुरबचन सिंह के हत्यारे रंजीत सिंह की सज़ा घटाने की बात आई, तो हरदेव सिंह ने कहा था कि यदि राष्ट्रपति ऐसा करना चाहते हैं तो मिशन को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी."

हरदेव सिंह ने लोगों से अपील की थी कि वो अापसी मनमुटाव को ख़त्म कर दें. अब बाबा गुरबचन सिंह की पुण्यतिथि 'मानव एकता मिशन' के रूप में मनाई जाती है.

हरदेव सिंह ने समाज विकास कई काम किए. इसी के साथ-साथ सामाजिक बाधाओं को दूर करने के लिए उन्होंने और उनके अनुयायियों ने अपनी पत्नी और बच्चों के पांव तक छुए थे.

वो अपने उपदेश में कहा करते थे कि "निरंकार भगवान सभी इंसानों में हैं."

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बाबा हरदेव सिंह व्यवहारिक थे. उन्होंने अपने युवा अनुयायियों के लिए एक दशक पहले अंग्रेज़ी शिक्षा शुरू कर दी थी. यह आध्यात्मिक शिक्षा से अलग था.

मिशन का दावा है कि भारत के 3000 केंद्रों सहित, 27 देशों के 200 केंद्रों को मिलाकर, उसके एक करोड़ से अधिक अनुयायी हैं.

मिशन के प्रवक्ता कृपा सागर कहते हैं, "हम जीवित रूप में शक्ति की पूजा करते हैं. हम शक्ति को किसी धातु या फिर किसी पत्थर की मूर्ति में नहीं ढूंढते."

बाबा हरदेव सिंह की पढ़ाई-लिखाई पटियाला के यादवेंदर पब्लिक स्कूल में हुई थी. बाबा ने आगे की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से की थी.

बाबा हरदेव सिंह कहते थे, "हमारा मिशन किसी धर्म, जाति और मज़हब को नहीं मानता है, हम भाईचारे में यकीन करते हैं."

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Image caption हादसे में बाबा हरदेव सिंह के दामाद अवनीत सेतिया की भी मौत हो गई थी.

इस मिशन का मुख्यालय दिल्ली में है, जो 20 एकड़ में फैला है और इसमें पांच एकड़ का एक तालाब भी है.

उनकी सभा में एक समय में पांच लाख़ लोग इकट्ठा हो सकते हैं.

शुक्रवार को न्यूयॉर्क से लौटते हुए एक कार हादसे में बाबा के साथ, उनके दामाद अवनीत सेतिया की भी मृत्यु हो गई थी.

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