'सेना को बचाने के लिए मेरी इज़्ज़त दांव पर लगाई'

कश्मीर पुलिस

भारत प्रशासित कश्मीर के हंदवाड़ा में कथित छेड़छाड़ की शिकार हुई लड़की ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

लड़की ने कहा है कि पुलिस ने उस पर दबाव डालकर बयान दिलाया था कि उससे छेड़छाड़ के लिए सेना का जवान नहीं बल्कि स्थानीय युवक जिम्मेदार हैं.

लड़की के मुताबिक उसे बिना बताए यह बयान सार्वजनिक भी कर दिया गया. प्रेस कांफ्रेस में पीड़िता ने कहा कि सेना के एक जवान ने उसका हाथ पकड़ा था.

हालांकि पुलिस उप महानिरीक्षक उत्तम चंद ने बीबीसी से कहा कि लड़की ने चीफ़ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था, इसलिए पुलिस की ओर से दबाव की बात बेतुकी है.

उनका कहना है कि पुलिस उसी बयान को आधार बनाकर कार्रवाई कर रही है.

बीते 12 अप्रैल को श्रीनगर से 74 किलोमीटर दूर हंदवाड़ा क़स्बे में कुछ स्थानीय लोगों ने सेना के जवान पर एक लड़की से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था.

इससे इलाके में तनाव फैल गया. इसके बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों और सेना की फ़ायरिंग में पांच लोग मारे गए थे.

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जम्मू-कश्मीर कोआलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी की ओर से सोमवार को पीड़ित लड़की की प्रेस कांफ्रेंस कराई गई.

पीड़िता ने कहा, "स्कूल में छुट्टी के बाद दोपहर दो बजे के आसपास जब मैं स्कूल से बाहर मार्केट में स्थित बाथरूम गई और तो वहां बने बंकर में मौजूद सेना का एक जवान आया और उसने मेरा हाथ पकड़ा."

पीड़िता के मुताबिक, "मैंने अपना हाथ छुड़ाया और रोते चिल्लाते हुए बाहर गई. बाहर दो तीन लड़के थे. इनमें मेरा एक पड़ोसी लड़का भी मौजूद था. पड़ोसी लड़के ने पूछा क्यों रो रही हो और उसने मुझे एक थप्पड़ भी मारा, तब दो तीन पुलिस वाले आ गए."

लड़की ने आगे बताया, "मोहम्मद शफ़ी नाम के एक पुलिसवाले ने बदतमीजी से हाथ पकड़ा और पुलिस स्टेशन ले गया. पुलिस वालों ने इस वाकये को किसी के सामने न बताने की बात कही और कहा कि इससे मेरी जान को ख़तरा हो सकता है."

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बयान का वीडियो बनाए जाने के संदर्भ में पीड़िता ने कहा, "एसपी ने सेना को बचाने के लिए मेरी इज्जत दांव पर लगा दी. क्या उसकी अपनी बेटियां नहीं थीं? बयान का जो वीडियो पुलिस ने बनाया था वो मुझे सिखा कर रिकॉर्ड किया गया. और उसी समय इसे सोशल नेटवर्क पर सार्वजनिक कर दिया गया, जबकि उन्होंने इसे अपने पास रखे रहने की बात कही थी."

पीड़िता ने राज्य महिला आयोग पर भी आरोप लगाया और कहा, "जब मैं महिला आयोग के पास पहुंची तो उसने भी मामले में सेना और पुलिस का पक्ष लिया."

इससे पहले भी पीड़ित लड़की के पिता ने जम्मू कश्मीर पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा था, "पुलिस ने बेटी के साथ-साथ मुझे और मेरी साली को बंद कर दिया. बेटी को गालियां दीं, उस पर थूका और ज़लील किया."

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उन्होंने पुलिस प्रोटेक्शन लेने से इनकार करते हुए कहा था, "अगर ख़तरा है तो पुलिस से. ये कभी भी हमें मार डालेंगे."

जम्मू-कश्मीर कोआलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटी ने कहा है कि क्योंकि सेना ने इस बात को क़ुबूला है कि उन्होंने वीडियो जारी किया है, इसलिए सेना के ख़िलाफ़ क़ानूनी कारवाई होनी चाहिए.

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