'कांग्रेस मुक्त भारत का संकेत नहीं मिलता'

  • 19 मई 2016
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असम में विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान में देश दो कदम आगे बढ़ गया है.

लेकिन वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन नहीं मानते कि ये विधानसभा चुनाव कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ने का संकेत देते हैं.

उनका मानना है, "कांग्रेस को ख़ासा नुकसान हुआ है, असम में भाजपा और बंगाल में तृणमूल की जीत अहम हैं लेकिन कांग्रेस ने जो वोट शेयर पाया और सीटें पाई हैं, उनसे कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ने की बात सिद्ध नहीं होती है."

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बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बीबीसी स्टूडियो में बातचीत के दौरान अरविंद मोहन ने कहा, "कांग्रेस पार्टी 125 से ज़्यादा विधानसभा सीटों पर जीती है और उसको वोट भी ज़्यादा मिले हैं. भाजपा को जितनी सीटें मिलीं हैं, और कांग्रेस को कुल जितनी सीटें मिली हैं, उन्हें देखते हुए ये कहना कि देश कांग्रेस मुक्त भारत की तरफ बढ़ गए हैं, कितना वाजिब है..."

उनका कहना है कि ममता, जयललिता की जीत और केरल में वाम दलों की जीत भी महत्वपूर्ण है. भाजपा किसी पूर्वोत्तर राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है.

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असम में भाजपा के लिए जीत के मायने क्या रहेंगे, इस पर अरविंद मोहन का कहना है कि जिस तरह से भाजपा ने असम का चुनाव जीता है और आइडेंटिटी का सवाल उठाया है, उससे ही उसके लिए समस्या पैदा हो सकती है.

वो कहते हैं, "ऐसे में चुनाव जीता जा सकता है लेकिन 50 साल पुराने मसले को हल करना आसान नहीं है, आगे का रास्ता आसान नहीं है. असम में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए हेमंत बिस्व शर्मा की महत्वकांक्षा को संभालना भाजपा के लिए मुश्किल होगा."

अरविंद मोहन के मुताबिक भाजपा ने बिहार और दिल्ली में मिली हार के बाद अपनी रणनीति में काफ़ी बदलाव किया है और भाजपा और संघ ने असम में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

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ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में प्रचंड बहुमत मिलने पर अरविंद मोहन कहते हैं कि ग़रीबों की लड़ाई लड़ना, सादगी से रहना और भ्रष्टाचार से खुद को व्यक्तिगत तौर पर दूर रख पाना ममता बनर्जी की बड़ी ताकत है.

उनके मुताबिक इन विधानसभा चुनाव में केरल में वामदलों की जीत की भी बहुत अहमियत है क्योंकि अगर वो नहीं जीतते तो वाम पार्टियां साफ़ हो जातीं.

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