सिंहस्थ कुंभ के पांच विवाद

  • 20 मई 2016
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मध्यप्रदेश के उज्जैन में पिछले लगभग महीने भर से जारी सिंहस्थ कुंभ 21 मई को ख़त्म हो जाएगा लेकिन इस बार का आयोजन कई विवादों के लिए भी याद किया जाएगा.

मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने एक धार्मिक आयोजन का राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश की है.

कुछ लोगों का आरोप था कि ये पहला मौक़ा था जब सिंहस्थ कुंभ के दौरान वैचारिक महाकुंभ के नाम पर राजनेताओं का जमावड़ा लगा.

वैचारिक महाकुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत और कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने शिरकत की. साथ ही कई देशों के राजदूतों को भी आयोजन में बुलाया गया था.

महाकुंभ में जो विवाद उपजे उसमें नरेंद्र मोदी का नागा साधुओं पर दिया गया बयान ही अकेला नहीं था:

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1. उज्जैन से चंद किलोमीटर दूर निनौरा में आयोजित वैचारिक महाकुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागा साधुओं पर टिप्पणी करके विवाद पैदा कर दिया. इससे नागा साधू नाराज़ बताए जा रहे हैं.

नरेंद्र मोदी ने कहा, "सिंहस्थ की पहचान नागा साधुओं तक ही सीमित हो गई है. कुंभ मेला यानी नागा साधू. उनकी फोटो निकालना, उनके दर्शन को जाना इसी के आसपास कुंभ मेला घूमता है."

2. मध्य प्रदेश सरकार के मुताबिक़ निनौरा में 'भव्य तैयारियों' पर 50 करोड़ रुपए ख़र्च किए गए थे.

3. सरकार ने इस कार्यक्रम में पर्यावरण की बड़े पैमाने पर अनदेखी की थी. कुछ इस तरह से पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोग 'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल' पहुंच गए.

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सामाजिक कार्यक्रता अजय दुबे इस पूरे कार्यक्रम को ही ग़ैर ज़रूरी बताते हैं.

अजय दुबे कहते हैं, "वैचारिक कुंभ कभी भी कुंभ का हिस्सा नहीं रहा. लेकिन सरकार ने इसके नाम पर भारी पैसा ख़र्च करके पर्यावरण को क्षति पहुंचाई है. तानाशाही दिखाते हुए किसानों से 550 बीघा ज़मीन ली गई और उसको नुक़सान पहुंचाया गया. बड़ी तादाद में पेड़ कटे और सीमेंट के स्ट्रक्चर तैयार किए गए. इस मामले में 'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल' ने नोटिस भी जारी किया है. सरकार को चाहिए कि वो किसानों को मुआवज़ा दे और जो अधिकारी ज़िम्मेदार है उनसे वसूली की जाए."

4. सरकार दलितों के लिए अलग से स्नान आयोजित कराना चाहती थी.

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में समरसता स्नान होना था. लेकिन उसके ख़िलाफ़ साधू-संतों के साथ विपक्षी कांग्रेस पार्टी भी खड़ी हो गई. आख़िरकार उसका नाम बदलकर संत समागम किया गया और सभी संतों के साथ स्नान हुआ.

5 कांग्रेस पार्टी ने पूरे मामले को उछालने की पूरी कोशिश की है.

पार्टी नागा साधुओं पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी को गैर ज़रूरी मानती है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव कहते हैं, "नागा साधुओं की परंपरा आदि काल से चली आ रही है. सिंहस्थ पहली बार उज्जैन नगरी में नहीं हो रहा है. देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए इस समुदाय का आकर्षण हमेशा से रहा है. उनपर टिप्पणी करना सिंहस्थ का अपनाम है. अचरज की बात है कि देश के प्रधानमंत्री उज्जैन आते है लेकिन उनके पास शिप्रा में डुबकी लगाने और महाकाल के दर्शन के लिए समय नहीं है."

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कांग्रेस ये भी मानती है कि इतना विवादित सिंहस्थ पहले कभी नहीं हुआ. ये पहला मौक़ा है जब राज्य सरकार ने इस धार्मिक कार्यक्रम को पूरी तरह से राजनैतिक बनाने के लिए हर संभव कोशिश की.

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