ऐपल के कुक ने भारत में क्या खोजा?

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आधी रात भारत पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद ऐपल के सीईओ टिम कुक बुधवार को मुंबई के एक मंदिर में नज़र आए.

वहां वो रिलांयस के मालिक मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी के साथ थे. अनंत जीओ 4जी सर्विस के कर्ता धर्ता हैं और कहा जा रहा है कि कंपनी साल 2016 के अंत तक मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव ला देगी.

टिम कुक ने कहा था कि ऐसे 'हाई स्पीड वाले नेटवर्क आईफ़ोन की क्षमता को सामने' लाएंगे.

तेरह सालों में पहली बार ऐपल के मुनाफ़े में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन भारत अकेला ऐसा देश था जहां ऐपल को फ़ायदा हुआ है.

साल 2015 की पहली तिमाही में जहां दुनिया भर में आईफ़ोन की बिक्री में 16 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई वहीं भारत में इसी दौरान 56 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.

किसी भी ऐपल सीईओ की यह पहली भारत यात्रा है. इससे पहले ऐपल की शुरुआत करने वाले स्टीव जॉब्स ने सत्तर के दशक में भारत की यात्रा की थी लेकिन वो ऐपल की स्थापना से पहले उस वक़्त एक हिप्पी के तौर पर अध्यात्मिक यात्रा पर आए थे.

अगर ऐपल के सीईओ के दौरे के हिसाब से किसी देश की अहमियत देखें तो कुक चीन को आठ नंबर देते हैं जबकि भारत को एक.

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भारत के बाज़ार में पांच हज़ार की क़ीमत वाले माबाइल फ़ोन का दबदबा है जबिक ऐपल का हाल में आए बेस मॉडल की क़ीमत 39,000 रूपए से शुरू होती है.

साइबर मीडिया रिसर्च (सीएमआर) के मुताबिक़ भारत के बढ़ते स्मार्टफोन बाज़ार में ऐपल का शेयर 3.4 फ़ीसदी है.

दुनिया के पैमाने पर सैमसंग के बाद ऐपल की स्थिति नंबर दो की है लेकिन भारत के स्मार्टफोन बाज़ार में यह सातवें स्थान पर आता है.

दूसरी तरफ ऐपल के लिए अमरीका के बाद चीन दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है.

चीन की अर्थव्यवस्था फिलहाल संकट के दौर से गुजर रही है. इसकी वजह से आईफ़ोन की बिक्री में कमी आई है और ऐपल का मुनाफ़ा कम हुआ है.

आईफ़ोन की बिक्री से ऐपल को अपने मुनाफ़ो का दो-तिहाई हिस्सा मिलता है.

ऐपल के लिए भारत के बाज़ार में अब भी कई संभावनाओं को खोजा जाना बाकी है जो कि ऐपल के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

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कंपनी ने भारत के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. ऐपल का भारत में पहला डेवलपमेंट सेंटर हैदराबाद में खुलेगा जहां 150 ऐपल डेवलपर्स ऐपल मैप पर काम करेंगे.

सरकार के सूत्रों ने 'द हिंदू' अख़बार से कहा है कि सेंटर बाद में अपने ख़ुद के कैंपस में शिफ्ट कर जाएगा और कर्मचारियों की संख्या 2500 तक हो जाएगी.

18 मई को ऐपल ने बेंगलुरु में डिज़ाइन और डेवेलपमेंट ऐक्सेलरेटर खोलने का एलान किया है. 2017 में खुलने वाला यह सेंटर आईओएस एप डेवलपर को मदद करेगा. चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ़ोकस 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम पर है इसलिए निश्चित तौर पर विनिर्माण क्षेत्र को लेकर चर्चा होगी.

क्या ऐपल भारत में आईफ़ोन का निर्माण करेगा?

ऐपल ऐसा ख़ुद से नहीं करनेवाला है. ऐपल ख़ुद से आईफ़ोन नहीं बनाता है. ताइवानी कंपनी फॉक्सकॉन चीन में आईफ़ोन का निर्माण करती है.

पिछले अगस्त में फॉक्सकॉन ने महाराष्ट्र में कई ब्रांडों के लिए पांच अरब अमरीकी डॉलर की निवेश की घोषणा की थी.

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इस साल की रिपोर्टों के मुताबिक़ संभावना थी कि फॉक्सकॉन, महाराष्ट्र में ऐपल डिवाइसों के निर्माण के लिए दस अरब अमरीकी डॉलर के लागत से एक प्लांट की स्थापना करेगा.

अभी तक इन योजनाओं की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन कंपनी ने मुंबई के नज़दीक चीनी कंपनी शाओमी और भारतीय कंपनी रिलायंस जीओ के उत्पादों के निर्माण के लिए जगह ले ली है.

भारत में निर्माण होने के कारण आईफ़ोन की क़ीमत में गिरावट आ सकती है.

आईफ़ोन महंगे होते हैं और 'प्रीमियम स्मार्टफोन की श्रेणी' में आते हैं. इस श्रेणी में तीस हज़ार से ऊपर के फ़ोन आते हैं.

इस श्रेणी में ऐपल का 44 फ़ीसदी शेयर है जो कि सैमसंग के क़रीब-क़रीब बराबर है.

एक साल से ऐपल का कोई मॉडल बाज़ार में नहीं आया है. पुराने आईफ़ोन सस्ते हैं लेकिन उनकी बिक्री कम होती है.

भारत के ग्राहक क़ीमत को लेकर सजग होने के बावजूद पुराने आईफ़ोन मॉडल ख़रीदने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते हैं.

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ऐपल के साथ समस्या है कि इसके नए मॉडल महंगे हैं और पुराने मॉडल में भारतीय ग्राहक कुछ ख़ास दिलचस्पी नहीं लेते हैं.

भारत में आईफ़ोन की बिक्री को बढ़ाने का एक रास्ता उन नए मॉडल वाले आईफ़ोनों को बेचना है जिन्हें अक्सर ग्राहक लौटा देते हैं और जिन्हें फैक्ट्री में भेजकर फिर से परीक्षण और प्रमाणित किया जाता है.

वे नए आईएमइआई नंबर और वारंटी के साथ फिर से बेचे जाते हैं. इसतरह के फ़ोन ऐपल दूसरे बाज़ारों में बेचता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आईफ़ोन को डिस्काउंट के साथ ख़रीदने में भारतीय ग्राहको की अधिक दिलचस्पी होगी.

लेकिन इसमें एक दिक़्क़त है कि सरकार 'ई-कचरा' और 'पुराने फ़ोनों को डंप' करने के नाम पर इस तरह के आईफ़ोनों को यहां लाने की इजाज़त न दे.

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