तो रिकॉर्ड के लिए फहराया गया तिरंगा?

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फहराया गया देश का कथित रूप से सबसे बड़े आकार का तिरंगा विवादों में घिर गया है.

शनिवार की रात इस झंडे को क्षतिग्रस्त होने के बाद उतार लिया गया था. इसके बाद से इस झंडे के आकार को लेकर विवाद शुरू हो गया है.

इससे पहले, झारखंड की राजधानी रांची में भी फहराया गया सबसे ऊंचा तिरंगा फट गया था. उसे बड़ी मुश्किल से उतारा गया था.

रायपुर के महापौर प्रमोद दुबे के अनुसार, "शनिवार को तिरंगा फट गया था, जिसके बाद हमें इसे उतारना पड़ा. अब हमने फिर से नया झंडा फहरा दिया है."

दरअसल 30 अप्रैल को रायपुर में 105 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा झंडा तेलीबांधा इलाके में फहराया गया.

इस झंडे के बारे में दावा किया गया था कि यह दुनिया का सबसे बड़ा तिरंगा झंडा है. मुख्यमंत्री समेत राज्य के जनसंपर्क विभाग ने इस सबसे बड़े झंडे का खूब प्रचार-प्रसार किया.

लेकिन दूसरे ही दिन तिरंगे को लेकर उस समय विवाद शुरू हो गया, जब झंडे को रोशन रखने के लिए लगाई गई लाइट बंद हो गई.

नियम ये है कि अगर रात में तिरंगा झंडा फहराया जाना है तो उस स्थान पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए.

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दो सप्ताह बाद यह बात सामने आई कि रायपुर नगर निगम ने जो झंडा फहराया है, उसका आकार 105 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा नहीं, बल्कि 90 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा है.

महापौर प्रमोद दुबे कहते हैं, "मुख्यमंत्री ने जिस दिन झंडा फहराया था, उसका आकार ज्यादा था. लेकिन हमारे सभी दस्तावेज़ों में 90 फीट लंबा और 60 फीट चौड़ा झंडा फहराए जाने का उल्लेख है."

लेकिन इस झंडे के आकार को लेकर आलोचकों का कहना है कि झूठी शान और रिकॉर्ड बनाने के लिए तिरंगा के सबसे बड़े होने का प्रचार किया गया. अब हालत यह है कि सरकार इस झंडे के सम्मान की भी रक्षा नहीं कर पा रही है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रभारी शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं, "राष्ट्रध्वज हमारे गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है. इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह राष्ट्रध्वज की गरिमा बरकरार रखे."

रांची की पहाड़ी मंदिर पर इसी साल 23 जनवरी को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 66 फीट लंबा और 99 फीट चौड़ा तिरंगा झंडा 293 फीट ऊंचे खंभे पर फहराया था. लेकिन तेज़ हवा में यह झंडा फट गया और भाजपा सरकार में राष्ट्र ध्वज के इस अपमान को लेकर राज्य भर में हंगामा मचा.

इसके बाद 28 अप्रैल को बड़ी मुश्किल से यह झंडा उतारा जा सका.

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