एक परिवार के चार 'लाट साहब'

  • 24 मई 2016
मां के साथ सिविल सेवा में चयनित क्षमा मिश्रा और लोकेश मिश्रा इमेज कॉपीरइट SAMIRATMAJ MISHRA

उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ के अनिल प्रकाश मिश्र के बमुश्किल दो कमरों के मकान में क़ामयाबी की इतनी बड़ी इमारत खड़ी हो जाएगी, ऐसा शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा.

अनिल प्रकाश मिश्र प्रतापगढ़ ज़िले के लालगंज अझारा क़स्बे में रहते हैं और ग्रामीण बैंक में मैनेजर हैं. उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं.

चारों ने क़ामयाबी की ऐसी मिसाल पेश की है कि न सिर्फ़ इलाक़े के बल्कि पूरे देश में उसकी चर्चा हो रही है.

देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा में उनके चारों बच्चों ने सफलता हासिल की है.

पिछले दिनों आए सिविल सेवा के परीक्षा परिणाम में सबसे बड़ी बेटी क्षमा मिश्रा ने और सबसे छोटे बेटे लोकेश मिश्र ने सफलता पाई, जबकि पिछले साल ही माधवी मिश्रा और योगेश मिश्रा इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफल हुए थे.

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Image caption क्षमा मिश्रा का चयन यूपीपीसीएस के लिए भी हुआ था, वो अभी मुरादाबाद में प्रशिक्षण ले रही हैं

बच्चों की सफलता से प्रसन्न अनिल प्रकाश मिश्र बातचीत के दौरान काफी भावुक हो जाते हैं और इसका श्रेय वो बेहद विनम्रता के साथ इनके अध्यापकों को देते हैं.

उनकी सबसे बड़ी बेटी क्षमा मिश्रा का चयन इस बार आईपीएस के लिए हुआ है. इससे पहले उनका चयन यूपीपीसीएस में भी पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए हुआ था और इस समय वो मुरादाबाद में प्रशिक्षण ले रही हैं.

क्षमा बताती हैं कि सबसे बड़ी होने के नाते उन्होंने अपने भाई बहनों का मार्गदर्शन भी किया और सभी साथ में रहकर इस परीक्षा के तैयारी में जुटे. दो साल के भीतर ही सभी ने सफलता हासिल करके दिखा दिया.

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इटावा के ताखा ब्लॉक में खंड विकास अधिकारी के पद पर तैनात लोकेश मिश्र अनिल प्रकाश मिश्र के सबसे छोटे बेटे हैं और इस बार उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा में 44वीं रैंक हासिल की है.

वो बताते हैं कि भाई बहनों के बीच प्रतियोगी नहीं, बल्कि सहयोगी का भाव रहा और एक-दूसरे की मदद की गई.

अनिल प्रकाश मिश्र के इन बच्चों ने क़स्बे के ही स्कूलों में पढ़ाई की और सफलता का परचम इन लोगों ने कोई पहली बार नहीं लहराया है बल्कि ऐसा वो बचपन से करते आए हैं.

सबसे छोटे बेटे लोकेश मिश्र ने आईआईटी से बीटेक किया और एक साल पहले ही उनका चयन यूपीपीसीएस में भी हुआ था.

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Image caption श्रीनारायण तिवारी से बात करते हुए समीरात्मज मिश्र

योगेश मिश्र भी इंजीनियर हैं और पिछले साल सिविल सेवा में चयनित हुए थे. वहीं बेटी माधवी मिश्रा मसूरी में ट्रेनिंग कर रही हैं और इससे पहले उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा में चयन हुआ था.

चारों भाई-बहनों के स्कूल शिक्षक श्रीनारायण तिवारी बताते हैं कि इनके अध्यापक भी इनकी प्रतिभा के कायल थे और उन्हें उम्मीद थी कि आगे चलकर ये सभी बड़ी सफलता अर्जित करेंगे.

श्रीनारायण तिवारी इसका श्रेय अनिल प्रकाश मिश्र और उनकी पत्नी को देते हैं.

वो कहते हैं कि इन दोनों ने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बच्चों की सफलता को बनाया और आखिरकार बच्चों ने ऐसा कर दिखाया. उनकी पत्नी बताती हैं कि बीमारी के बावजूद उन्होंने चारों बच्चों को पढ़ाई के लिए घर से दूर भेजा.

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Image caption योगेश मिश्रा का पिछले साल सिविल सेवा में चयन हुआ था

श्रीनारायण तिवारी के मुताबिक अच्छे पद पर नौकरी करने के बावजूद अनिल प्रकाश मिश्र का घर आधुनिक सुख सुविधाओं से काफी दूर है.

उनके इस दावे की पुष्टि के लिए किसी प्रमाण की ज़रूरत नहीं है बल्कि उनके घर को देखकर कोई भी इसका अनुमान सहज ही लगा सकता है.

हमने क्षमा मिश्रा से जब उनके अध्ययन कक्ष को देखने की जिज्ञासा प्रकट की तो वो अपनी माँ की ओर देखकर मुस्कराने लगी और फिर जवाब दिया, “आप जहां बैठे हैं, यही हमारा स्टडी रूम, बेड रूम ड्राइंग रूम, सब कुछ है.”

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