मेडिकल परीक्षा के अध्यादेश को मिली मंज़ूरी

  • 24 मई 2016
एम्स इमेज कॉपीरइट PTI

राष्ट्रपति ने देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले के लिए राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) के दायरे से राज्य बोर्डों को एक वर्ष के लिए बाहर रखने संबंधी अध्यादेश पर दस्तख़त कर दिए हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस साल राज्य सरकारों को नीट से बाहर रखा गया है. लेकिन निजी कालेज की सीटें नीट के जरिए ही भरी जाएंगी.

उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को होने वाले नीट के दूसरे चरण की परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक़ ही होगी.

इमेज कॉपीरइट EPA

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केवल इस साल के लिए छात्रों के पास यह अधिकार होगा कि या तो वे राज्य सरकारों की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षा में बैठें या नीट में.

नड्डा ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए परास्नातक (पीजी) के लिए इस साल दिसंबर में होने वाली प्रवेश परीक्षा नीट ही होगी.

सरकार ने इस अध्यादेश के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया जिसमें देश के सभी सरकारी, डीम्ड यूनिवर्सिटी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक समान प्रवेश परीक्षा नीट को अनिवार्य कर दिया गया था.

नीट परीक्षा का पहला दौर एक मई को हो चुका है जिसमें लगभग 6.5 लाख छात्र बैठे थे. इस परीक्षा की अगली तारीख 24 जुलाई है.

लेकिन इस अध्यादेश के जारी होने के बाद राज्य बोर्डों के छात्रों को 24 जुलाई को होने वाली परीक्षा में बैठने की ज़रूरत नहीं होगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार