अफ्रीकियों पर हमले नस्लवाद नहीं तो और क्या?

  • 30 मई 2016
अफ्रीकी मूल के नागरिकों पर हमले इमेज कॉपीरइट Getty

दिल्ली में अफ्रीकी मूल के नागरिकों पर हुए हमले मीडिया में सुखियां बन रहे हैं. गुरुवार को राजपुर और मैदानगढ़ी के बीच केनेथ नाम के एक अफ्रीकी पर हमले के मामले में प्रत्यक्षदर्शी जैक्सन से बीबीसी संवाददाता ने बातचीत की.

फोन पर बातचीत में जैक्सन ने अफ्रीकियों पर हमलों को नस्लवादी मामला बताया हालांकि पुलिस इससे सहमत नहीं है.

जैक्सन के मुताबिक उस रात जब वो हादसे के नज़दीक ही थे उन्हें केनेथ का कॉल आया था.

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि पत्नी और चार महीने के बच्चे के साथ कार में मौजूद केनेथ पर कई लोगों ने हमला कर दिया, कार के शीशे तोड़ दिए थे.

उस रात और भी लोगों को बुरी तरह से मारा गया. एक व्यक्ति को ऑटो से निकालकर मारा गया. किसी को नहीं पता कि इस घटना की शुरुआत कैसे हुई.

उनका आरोप है कि पीड़ितों को क्रिकेट बैट से मारा गया, सिर पर मारा गया, एक की हालत तो इतनी ख़राब है कि वो ठीक से चल भी नहीं पा रहा है.

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केवल यही नहीं, आरोप ये भी है कि अफ्रीकियों को उनके देश वापस लौटने को कहा गया और साथ ही ये भी कहा कि उनकी यहां ज़रूरत नहीं है.

जैक्सन का अनुमान है कि शायद उन लोगों का गुस्सा किसी काले व्यक्ति पर था और इसी की सज़ा उन्होंने दूसरे अफ्रीकियों को पीटकर दी.

केनेथ के मामले में जैक्सन कहते हैं कि लोगों का आरोप है कि वो बहुत ज़ोर से म्यूज़िक बजा रहा था. जैक्सन सवाल पूछ रहे हैं कि जो गाड़ी चला रहा हो वो कैसे तेज़ म्यूज़िक बजा सकता है.

जैक्सन के मुताबिक 16 से ज्यादा लोगों को पीटा गया और पांच गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया.

39 साल के एक्टर जैक्सन पिछल तीन सालों से भारत में रह रहे हैं और उनका कहना है कि उन लोगों के साथ भेदभाव आम बात है.

हालांकि वो कहते हैं कि वो खुद ऐसे विवादों से बचते हैं, किसी से बहस नहीं करते. उनका मकसद केवल अपने सपनों को पूरा करना है.

लेकिन उनके अंदर की नाराज़गी साफ़ झलकती है. वो पुलिस की कार्रवाई से तो संतुष्ट हैं लेकिन चाहते हैं कि यहां कि सरकार लोगों को अफ्रीकियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए शिक्षित करें.

ऑलिवर की हत्या की घटना याद करते हुए जैक्सन कहते हैं कि वो लड़का अब कभी नहीं लौटेगा.

Image caption भारत में रहने वाले अफ्रीकी

वहीं 26 मई की घटना के मामले में बीबीसी संवाददाता से बातचीत में पीड़ित लुकी ने कहा कि वो हादसे वाली रात ऑटो में चर्च जा रहे थे जब कुछ लोगों ने उनके ऑटो को रोका लिया.

लोगों ने पहले ऑटो वाले को मारा और फिर उनसे बहस शुरू कर दी. उसके बाद पीछे से किसी ने आकर लुकी को थप्पड़ जड़ दिया.

लहुलूहान लुकी ने पुलिस को बुलाया. पुलिस उन्हें एम्स ले गई. बाद में उनसे पूछताछ की गई.

पूछे जाने पर कि क्या उनपर लगाए गए आरोप कि वो शराब पीकर लोगों से बदसलूकी कर रहे थे, ये सच है, तो उनका कहना था कि वो शराब और सिगरेट पीते ही नहीं हैं.

शोर मचाने के लगाए गए आरोप पर सफाई देते हुए लुकी का कहना था कि वो राजपुर में रहते ही नहीं हैं.

पिछले साल नवंबर से दिल्ली में रहे रहे लुकी इस घटना से बेहद नाराज़ हैं, हालांकि उनका कहना है कि यहां सारे लोग बुरे नहीं हैं.

(संवाददाता वात्सल्य रॉय से बातचीत के आधार पर)

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