दिल्ली से ग़ायब हुआ बच्चा बांग्लादेश में मिला

  • 30 मई 2016

दिल्ली का दस साल का सोनू इन दिनों बांग्लादेश के जसोर में एक शेल्टर होम में रह रहा है.

हालाँकि उसकी माँ का पता चलने के बाद सोनू को दिल्ली भेजे जाने की तैयारी शुरू हो गई है और सोनू अपनी माँ से बात भी कर रहा है.

उसने बताया है कि माँ ने भरोसा दिया है कि वो उसे जल्दी अपने पास बुला लेगी.

सोनू के बांग्लादेश पहुँचने और यहाँ पाँच साल बिताने की कहानी यातनाओं से भरी है.

सोनू ने बीबीसी बांग्ला सेवा को बताया, “पांच साल पहले मैं यहाँ आया, एक महिला मुझे यहाँ ले आई थी. जहाँ मैं रहता था वहाँ लोग खाना पकवाते थे, कपड़े धुलवाते थे, बहुत काम करवाते थे और नहीं करने पर मारते-पीटते थे.”

इस मारपीट से तंग आकर सोनू एक दिन वहां से भाग निकला और पड़ोस के लोगों ने उसकी मदद की.

इमेज कॉपीरइट EPA
Image caption यह तस्वीर बांग्लादेश की सांकेतिक तस्वीर है.

बेतागी थाना प्रभारी रफ़ीक़-उल-इस्लाम का कहना है कि जो परिवार सोनू को बांग्लादेश ले आया, उसके साथ कुछ स्थानीय लोगों के विरोध के बाद यह मामला कोर्ट तक जा पहुँचा.

बच्चे की माँ माधुरी ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि पाँच साल पहले उनका बच्चा ग़ायब हो गया था और रोहिमा नामक बांग्लादेशी महिला उसे लेकर भाग गई थी.

माधुरी ने बताया, “ये 2010 के मई की घटना है. सोनू बाहर खेल रहा था और खेलने के दौरान वे उसे उठाकर ले गए. 24 तारीख को सुबह हमने थाने में रिपोर्ट लिखवाई. बिना सबूत के हम किसी का नाम नहीं ले सकते, तो हमने गुमशुदा होने की रिपोर्ट लिखवाई.”

सोनू शेल्टर होम तक कैसे पहुँचा, ये जानने के लिए बीबीसी की बांग्ला सेवा ने शेल्टर के सहायक निदेशक मोहम्मद शहाबुद्दीन से बात की.

उन्होंने बताया, “यह बच्चा बरगुना की अदालत के निर्देश से 22 दिसंबर को हमारे यहाँ लाया गया. अदालत के निर्देश के अनुसार, जब तक उसके अभिभावक नहीं मिल जाते, तब तक उसे यहीं रखा जाएगा.”

इमेज कॉपीरइट EPA

शहाबुद्दीन ने कहा, “जमाल नाम का एक व्यक्ति भारत गया और बहुत खोजने के बाद उसे बच्चे का अभिभावक मिल गया. अभिभावक ने हमसे बात की. हमने उसे साबित करने के लिए कहा है. इस बीच भारतीय उच्चायोग ने हमसे सबूत मांगा है. ये दो देशों का मामला है, इसलिए यात्रा की इजाज़त लेना, कोर्ट की इजाज़त लेना ज़रूरी है.”

मानवाधिकार संगठन 'जसोर राइट्स' के प्रमुख बिनॉय कृष्ण मल्लिक कह रहे हैं कि बरगुना के स्थानीय निवासी जामालिब-ए-मुसाई ने मामला कोर्ट में उठाया और बाद में दिल्ली जाकर बच्चे की माँ को भी ढूंढ निकाला है.

जमालिब-ए-मुसाई के बेटे फिरदौस ने बताया, “मेरे पिता ने बच्चे के माता-पिता का पता बड़ी मशक्कत के बाद ढूंढ़ा उसके बाद वो दिल्ली गए. दिल्ली में बहुत खोजने के बाद उन्होंने बच्चे की मां और उनके पिता को ढूंढ़ा निकाला. फिर वो वहाँ के मुख्यमंत्री से मिले और उनके सामने पूरे मामले को पेश किया.”

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

फिरदौस का आरोप है कि इस घटना के कारण रोहिमा बेगम के परिवार की तरफ से उन्हें अलग-अलग तरीके से परेशान किया जा रहा है.

लेकिन सभी आरोपों को ग़लत बताते हुए रोहिमा बेगम की बहन हाशी बेगम कह रही हैं कि सोनू दिल्ली में रह रही उनकी बहन रोहिमा बेहम के पति की पहली पत्नी की संतान है.

हाशी बेगम ने बताया, “मेरी बहन ने फ़ोन किया कि उनके पति 6 महीने से लापता हैं. वो कैसे बच्चों को पालेंगी. बड़ी मुश्किल से खाने के लिए पैसे जुटा पा रही हैं. इसलिए बेटा-बेटी को मेरे पास छोड़ गए. फिर वो काम करने दिल्ली चली गईं.”

हालाँकि इस मामले को भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली बच्चों की तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा है. हाशी बेगम का कहना है कि तस्करी के नाम पर उनके परिवार को बदनाम किया जा रहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार