'ज्यादा दिन नहीं दबेगा बीजेपी-पीडीपी टकराव'

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भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी की गठबंधन सरकार के बीच कश्मीर से विस्थापित हुए पंडितों के लिए अलग टाउनशिप और सैनिकों के लिए अलग कॉलोनियों पर अभी तक विचार साफ़ नहीं हैं.

तोल-मोल के बाद 13 महीने पहले बनी पीडीपी और बीजेपी की सरकार एक बार फिर संकट में फंसती नज़र आ रही है.

इन मुद्दों पर अंदरूनी संकट खुलकर सामने तो नहीं आ रहा है, लेकिन दोनों दलों के नेताओं के बयानों से इस बात को साफ़ तौर पर पढ़ा जा सकता है कि उनकी राय बंटी हुई है.

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पीडीपी ने इस बात को फ़िलहाल स्पष्ट किया है कि सैनिकों के लिए कोई कॉलोनी नहीं बन रही है.

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने श्रीनगर में मीडिया को बताया, "जहां तक सैनिक कॉलोनी की बात है ये एक हवा उड़ाई जा रही है. जबकि इसके लिए ज़मीन नहीं दी गई है."

वहीं बीजेपी का कहना है कि सैनिक अगर कॉलोनी बनाने की मांग कर रहे हैं तो इसमें बुरा क्या है.

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उप-मुख्यमंत्री डॉक्टर निर्मल सिंह बताते हैं, "साल 1969 में भी जम्मू में सैनिक कॉलोनी बनी थी. जम्मू भी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, उस समय शेख अब्दुल्ला की सरकार थी और वहां भी जम्मू-कश्मीर के सभी नागरिक रह रहे हैं. ये मांग गलत नहीं है. कोई भी सैनिक ऐसी मांग करने का हक़ रखता है."

सैनिक कॉलोनी को लेकर बीजेपी का रवैया सख़्त है. बीजेपी के नेता ये भी कह रहे हैं कि वो इस मुद्दे को पीडीपी और केंद्र सरकार के साथ उठाएंगे."

अलगाववादियों के पंडित और सैनिक कॉलोनी के विरोध पर भी बीजेपी और पीडीपी एक किश्ती में सवार नहीं हैं. पीडीपी अलगाववादियों के विरोध पर खामोश है. वहीं बीजेपी खुलकर अलगाववादियों को चुनौती दे रही है.

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बीजेपी के विधायक रविंदर राना कहते हैं, "कश्मीरी पंडित जब भी कश्मीर आएंगे वह मान सम्मान के साथ आएंगे. वह सैयद अली शाह गिलानी, सैयद सलाउद्दीन और हाफिज़ सईद से भीख मांगकर नहीं आएंगे."

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पीडीपी के वरिष्ठ नेता, मंत्री और सरकार के प्रवक्ता नईम अख़्तर ने पंडित कॉलोनी को लेकर कहा, "अगर पंडितों को अलग कॉलोनियों में नहीं रखा जाए तो फिर गिलानी साहब या यासीन मालिक साहब ही हमें बताएं कि हम क्या करें."

कश्मीर के अलगाववादी, पंडितों और सैनिकों के लिये कश्मीर में अलग कॉलोनियां बनाने का विरोध कर रहे हैं. इन कॉलोनियों को बनाने के खिलाफ़ दो दिन पहले अलगाववादियों ने कश्मीर बंद भी बुलाया था.

पंडितों के लिए अलग टाउनशिप और सैनिक कॉलोनी पर पीडीपी और बीजेपी के साफ़ तौर पर सामने न आने को लेकर विपक्षी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी निशाना साधा है.

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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा, "राज्य में अभी ज़मीन को लेकर तीन बड़े मुद्दे हैं लेकिन सरकार की तरफ़ से उन पर कोई साफ़ बात नहीं की जा रही है."

विश्लेषक भी मानते हैं कि भले ही सैनिक कॉलोनी और पंडितों के लिये अलग टाउनशिप पर बीजेपी और पीडीपी के अंदर का टकराव खुल कर सामने नहीं आ रहा है, लेकिन इसे ज्यादा देर तक दबाया नहीं जा सकता है.

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कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक परवेज़ मजीद कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि दोनों ही जमातों में कई सारे मुद्दों पर राय एक है. दोनों में मुफ़्ती मोहम्मद सईद के ज़माने से ही ये चीज़ मौजूद थी और अब जबकि महबूबा मुफ़्ती के साथ दोबारा सरकार बनी है तो आज भी ये दोनों, सैनिक कॉलोनी, पंडित टाउनशिप और दूसरे मामलों पर बंटे हुए हैं. मुमकिन है दोनों दल किसी समय तक आपसी टकराव को दबाने की कोशिश करें लेकिन ज़्यादा देर तक ये ऐसा नहीं कर सकते हैं. ख़तरे की घंटी तब भी बज रही थी और आज भी बज रही है."

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