वाड्रा और विवाद, दोनों साथ-साथ

  • 31 मई 2016
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कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा फिर विवादों में हैं.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा का संबंध कथित तौर पर हथियारों के एक विवादित सौदेबाज़ से है और दोनों के बीच ईमेल भेजे गए हैं. साथ ही रिपोर्टों में लंदन में रॉबर्ट वाड्रा की कथित संपत्ति की बात भी की गई है.

रॉबर्ट वाड्रा के वकीलों ने रिपोर्टों को ग़लत बताया है. समाचार चैनल एनडीटीवी के मुताबिक़ कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “कांग्रेस के विरोधियों द्वारा रॉबर्ट वाड्रा को सुव्यवस्थित ढंग से निशाना बनाया जा रहा है.”

सोनिया गांधी ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया है और सरकार से आरोपों को साबित करने को कहा है.

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आइए जानते हैं रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े सात विवाद.

  • वाड्रा-डीएलएफ़ विवाद: अक्टूबर 2012 में आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाए कि रॉबर्ट वाड्रा ने दिल्ली और आसपास में कई ज़मीन-जायदाद खरीदी और उसके लिए धन आया रियल इस्टेट कंपनी डीएलएफ़ की ओर से जिसने रॉबर्ट वाड्रा को “ग़ैर ज़मानती ब्याज मुक्त कर्ज़” दिए. वाड्रा और डीएलएफ़ दोनो ने आरोपों से इंकार किया है. मामले की जांच जारी है. आरोप लगाए गए कि वाड्रा ने इसके लिए गांधी परिवार के नाम का गलत इस्तेमाल किया.
  • अशोक खेमका: आईएएस अफ़सर अशोक खेमका को वाड्रा के ज़मीन विवाद मामले में व्हिसल-ब्लोअर माना जाता है और रिपोर्टों के मुताबिक़ सरकारों के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के कारण 23 सालों में उनका 45 बार तबादला हो चुका है. अशोक खेमका का आरोप था कि कांग्रेस सरकार ने उन पर इसलिए निशाना साधा और परेशान किया क्योंकि उन्होंने रॉबर्ड वाड्रा और डीएलएफ़ के बीच समझौते को रद्द कर दिया.
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  • 'मैंगो पीपल': समाचार एजेंसी पीटीआई ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि जब रॉबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो उन्होंने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा – ‘मैंगो पीपल इन बनाना रिपब्लिक’. इसका मतलब निकाला गया कि वाड्रा भारत को बनाना रिपब्लिक और लोगों को ‘मैंगो पीपल’ कहा है. उनकी टिप्पणी पर विवाद होने के बाद वाड्रा ने अपना फ़ेसबुक अकाउंट बंद कर दिया था.
  • गु़ुस्सा: साल 2014 में जब समाचार एजेंसी एएनआई के एक पत्रकार ने ज़मीन विवाद पर उनसे सवाल पूछा तो बेहद गुस्से में वाड्रा ने उनसे पूछा, ‘क्या आप गंभीर हैं?’ और फिर ये बात बार-बार दोहराई और फिर माइक को झटककर आगे बढ़ गए.
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  • ‘प्रियंका की ज़रूरत नहीं’: अप्रेल 2016 में समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “अपनी ज़िंदगी सुधारने के लिए मुझे प्रियंका की ज़रूरत नहीं थी.” वाड्रा ने कहा, “मेरे पास काफ़ी था, मेरे पिता ने मुझे बहुत कुछ दिया था. उन्होंने मुझे शिक्षा दी.”
  • चुनाव की ओर?: रिपोर्टों के मुताबिक वर्ष 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान मीडिया से बातचीत में रॉबर्ट वाड्रा ने कहा था कि उन पर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से चुनाव लड़ने का बहुत दबाव था लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया. उन्होंने कहा, “लोग मांग कर रहे थे कि मैं (सुल्तानपुर से) चुनाव लड़ूं लेकिन मेरे मन में साफ़ था कि ये सही जगह नहीं है. मुझे मेरे परिवार की वजह से पहचाना जा रहा है.” इस बयान से इन अटकलों को बल मिला कि वो चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.
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  • सुरक्षा जांच: घरेलू हवाईअड्डों पर जिन लोगों को सुरक्षा जांच से मुक्त रखा गया है, उस सूची में रॉबर्ड वाड्रा का भी नाम था. इसे लेकर कई दिनों तक काफ़ी हंगामा मचा. सितंबर 2015 में ख़बर आई कि वाड्रा को उस सूची से हटा लिया गया है. लेकिन मई 2016 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक ख़बर के मुताबिक़ कुछ मामलों में अभी भी रॉबर्ड वाड्रा सुरक्षा जांच से मुक्त हैं.

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