क्या कृषि सेस से बदलेगी कृषि की सूरत?

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बुधवार से देशभर में बढ़ा हुआ सर्विस टैक्स लागू हो गया जिससे आपकी जेब पर असर पड़ सकता है.

सरकार कृषि कल्याण सेस के ज़रिए कृषि क्षेत्र के लिए धन जुटाना चाहती है. इसीलिए सर्विस टैक्स एक जून से 14.5 फ़ीसदी से बढ़ाकर 15 फ़ीसदी कर दिया गया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के आम बजट में कृषि कल्याण के लिए सेस लगाने का ऐलान किया था. यह सेस सभी चीज़ों और सभी सर्विसेज पर लागू किया जाएगा.

बीबीसी संवाददाता दिनेश उप्रेती से बातचीत में अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा कि कृषि सेस लगाए जाने से महंगाई पर बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था को लगातार दो सूखों का सामना करना पड़ा है.

शुभदा बताती हैं, ''सरकार की कोशिश है कि कृषि उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए निवेश आना चाहिए. भारत को सूखे से होने वाले नुकसान का असर अर्थव्यवस्था पर न पड़े, इसके लिए इस सेस से मिलने वाले फंड को ज़रिया बनाया जा सकता है.''

कृषि सेस का उपयोग सूखे से निपटने के लिए किए जाने वाले खर्चों और फंडिंग पर किया जाएगा.

उनके मुताबिक संभव है कि ये सेस कम अवधि के लिए लगाया जाए लेकिन अगर कृषि के उत्पाद को बढ़ाना है तो निवेश आना बहुत ज़रूरी है.

अर्थशास्त्री शुभदा राव के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था रफ़्तार पकड़ रही है और चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़े काफ़ी अच्छे आए हैं.

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चौथी तिमाही में कृषि का उत्पाद 2.3 फ़ीसदी तक बढ़ा है, साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में भी उछाल देखा गया है.

शुभदा राव ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. हालांकि कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है.

लेकिन माइनिंग और बिजली उत्पादन से देश की अर्थव्यवस्था को काफ़ी मदद मिली है.

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