आदित्यनाथ और स्मृति इरानी पर 'तनातनी'

  • 3 जून 2016
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भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ लोगों का कहना है कि यूपी में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर फ़िलहाल दो ही नाम हैं, लेकिन उन पर आम राय नहीं बन पा रही है.

पहला नाम है केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्य सभा सांसद स्मृति इरानी का और दूसरा नाम है गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ का.

लेकिन भीतर के लोगों के अनुसार पार्टी और आरएसएस में पिछले दो हफ़्तों से इस बात को लेकर 'तनातनी' जारी है कि बतौर सीएम उम्मीदवार पार्टी किसका नाम घोषित कर सकती है.

इन वरिष्ठ नेताओं के अनुसार आरएसएस की राय ये दिख रही है कि पार्टी को कैडर की बात सुनते हुए योगी आदित्यनाथ को उम्मीदवार बनाना चाहिए.

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योगी आदित्यनाथ प्रदेश के उन नेताओं में से एक हैं जिन्होंने खुलकर हिंदुत्व और हिन्दू समाज की बात की है और अक्सर दूसरे समुदायों के प्रति अपने कुछ बयानों को लेकर विवाद में भी रहे हैं.

2014 के आम चुनावों से पहले 'लव जिहाद' पर उनके कई विवादास्पद बयान और भाषण भी सुनने को मिलते रहे हैं.

आरएसएस और इसकी सहयोगी संस्था बजरंग दल के प्रदेश नेतृत्व से बात करने पर लगता है कि वे मान कर चल रहे हैं कि आगामी चुनावों में हिंदुत्व एक बड़ा मुद्दा रहेगा.

एक शीर्ष नेता ने कहा, "सभी को पता है कि 2014 के आम चुनावों में भाजपा के लिए आरएसएस कैडर घर-घर गया और उसका नतीजा सभी ने देख लिया".

गौरतलब है कि प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से भाजपा गठबंधन को 73 सीटें मिलीं थी.

आरएसएस के नेताओं ने भाजपा से साफ़ कर दिया है कि चूंकि आदित्यनाथ प्रदेश के हैं और स्मृति इरानी अमेठी से संसदीय चुनाव लड़ने के बावजूद 'बाहरी' हैं, इसलिए उनका मत योगी के पक्ष में जाएगा.

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इधर, भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि प्रदेश में जिन नामों की चर्चा हो रही है उसमें 'शीर्ष पर स्मृति इरानी का ही नाम है'.

भाजपा को लग रहा है कि उनकी सीधी लड़ाई बसपा से है जिसका नेतृत्व एक महिला, मायावती, कर रहीं हैं और उनके ख़िलाफ़ स्मृति जैसी कोई 'एग्रेसिव महिला ही नहले पर दहला साबित होगी'.

लेकिन पार्टी की तरफ से आरएसएस को कथित तौर से 'मनाने की कई कोशिशें अभी तक नाक़ाम रहीं हैं, लेकिन जल्द ही एक अंतिम फ़ैसला ले लिया जाएगा'.

उत्तर प्रदेश के भाजपा प्रवक्ता चंद्र मोहन ने पूछे जाने पर इस कथित तनातनी पर तो टिप्पणी नहीं की.

उन्होंने कहा, "हम सरकार बनाने को लेकर कटिबद्ध हैं बस. सीएम उम्मीदवार के लिए पार्टी के पास प्रदेश में नेताओं का कोई अभाव नहीं हैं".

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लेकिन पार्टी नेताओं ने बिना रिकॉर्ड पर आए इस बात को दोहराया है कि अब प्रदेश के नए भाजपा अध्यक्ष और ओबीसी नेता केपी मौर्य और सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी के नामों पर कोई ख़ास चर्चा नहीं हो रही है.

इस बीच, पिछले कुछ दिनों में जब-जब स्मृति इरानी या आदित्यनाथ से दावेदारी का सवाल पूछा गया है तो उनके जवाब यही रहे हैं, "हम सभी पार्टी के कार्यकर्ता हैं. इस तरह के फ़ैसले पार्टी तय करेगी".

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी ज़ोर पकड रही है और सिर्फ़ दो बड़ी पार्टियां ऐसी हैं जिनके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अभी तक साफ़ नहीं हुए हैं.

पहली भाजपा और दूसरी कांग्रेस. अब चूंकि प्रदेश में थोड़ी कमज़ोर हो चुकी कांग्रेस पार्टी में 'आंतरिक मंथन' का दौर दिख रहा है इसलिए उससे ज़्यादा दिलचस्पी लोगों को भाजपा में दिख रही हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह इन चुनावों को पहले ही 'ऐतिहासिक' बता चुके हैं.

मौजूदा सरकार समाजवादी पार्टी की ओर से माना जा रहा है कि पार्टी अपने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ही अगला चेहरा बन कर उतार रही है.

उधर, बहुजन समाज पार्टी की तरफ़ से उम्मीदवार मायावती ही रहेंगी, ये तो तय ही है.

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