पठानकोट में 'पाक सरकार या एजेंसी का हाथ नहीं'

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भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डायरेक्टर शरद कुमार ने कहा है कि इस बात का कोई सीधा सबूत नहीं मिला है कि पठानकोट आतंकवादी हमले में पाकिस्तान सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने जैशे मोहम्मद या इसके मुखिया मसूद अज़हर या उसके साथियों की मदद की थी.

एक भारतीय वेबसाइट में प्रकाशित एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि एनआईए ने भारत में जांच पूरी कर ली है, अब उन्हें पाकिस्तान से निमंत्रण का इंतज़ार है.

पठानकोट हमले की जांच के लिए एनआईए पाकिस्तान जाना चाहती है.

कुछ महीने पहले पाकिस्तान का एक जांच भारत आया था. ये दल पठानकोट भी गया था.

तब से ही ये अटकलें लगायी जा रही थीं कि पाकिस्तान सरकार एनआईए को पाकिस्तान आने की अनुमति देगी.

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शरद कुमार के अनुसार वो पाकिस्तान जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

उधर शरद कुमार के इंटरव्यू पर अपनी प्रितिक्रिया देते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मुहम्मद नफीस ज़करिया ने एक ट्वीट में कहा कि एनआईए के डायरेक्टर के बयान से पाकिस्तानी रूख़ की पुष्टि हो जाती है.

न्यूज़18 पर प्रकाशित इंटरव्यू में शरद कुमार के अनुसार पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मुहम्मद के मौलाना मसूद अज़हर और उनके भाई रउफ अज़हर के ख़िलाफ़ पक्के सबूत मिले हैं.

उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी सरकार उन्हें जांच के लिए वहां जाने की इजाज़त नहीं भी देती है तब भी चार्जशीट में इन दोनों भाइयों के नाम शामिल किये जाएंगे.

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न्यूज़18 के सवाल के जवाब में शरद कुमार ने कहा, "अब तक इस बात का सबूत नहीं मिला है कि पाकिस्तानी सरकार या सरकार एजेंसी ने हमले में (पाकिस्तान की) जैश या मसूद अज़हर या उसके सहयोगियों की मदद की थी."

उन्होंने इस बात से भी इंकार किया कि हमले में भारत के अंदर के लोगों का हाथ था.

इस साल 2 जनवरी को पठानकोट के एयर फ़ोर्स स्टेशन पर बंदूक़धारियों के दस्ते ने हमला किया था. हमला 17 घंटों तक जारी रहा.

हमले में सुरक्षा बल के तीन जवान और पांच हमलावर मारे गए थे. सईद सलाहुद्दीन के नेतृत्व वाली यूनाइटेड जिहाद काउन्सिल ने हमले की ज़िम्मेदारी कबूल की थी. भारत सरकार को जैश का हाथ होने के संकेत जांच के शुरू के दिनों में ही मिल गए थे.

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