त्रिनिदाद टोबेगौ के दिल में भी बसा है फगुआ

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भूटान की राजधानी थिंपू में भारतीय दूतावास में डिप्टी चीफ़ ऑफ़ मिशन विश्वदीप डे ने कहा है कि कैरीबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो के दिल में भी फगुआ (होली) बसा हुआ है. यहां दीवाली की भी धूम होती है. फगुवा वहां की राष्ट्रीय छुट्टी में शामिल है और भारत के सांस्कृतिक केंद्र काफी लोकप्रिय हैं. झारखंड- बिहार के लोगों का भी वहां खासा प्रभाव है.

विशवदीप डे सरकारी कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय दौरे पर झारखंड आए थे.

त्रिनिदाद और टोबैगो में बसे झारखंड मूल के लोगों को उनके पूर्वजों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए झारखंड सरकार ने एक नोडल अधिकारी प्रतिनयुक्त करने का फैसला लिया है.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने बताया कि भारत सरकार चाहती है कि राज्यों का, दूतावासों और विदेश मंत्रालय के साथ सीधा संपर्क और समन्वय रहे, ताकि विकास के नए आयाम तैयार किए जा सकें.

उन्होंने कहा कि त्रिनिदाद और टोबैगो की आबादी 13 लाख है. इनमें लगभग 42 फ़ीसदी भारतीय हैं. जबकि बिहार और झारखंड मूल के लोग ज्यादा हैं. यहां और वहां के खान-पान में भी काफी समानता है.

विश्वजीत डे खुद झारखंड के गोमिया क्षेत्र के रहने वाले हैं.

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव संजय कुमार बताते हैं कि इस बातचीत के बाद हम कई तैयारियों में जुटे हैं. सरकारी स्तर पर कई तथ्य भी जुटाए जा रहे हैं.

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वे बताते हैं कि झारखंड मूल के करीब पचास हज़ार लोग त्रिनिदाद और टोबैगो में बसे हैं. सौ–डेढ़ सौ साल पहले वे लोग वहां जाकर बस गए थे. व्यापार, बैंकिग तथा पर्यटन के क्षेत्र में वे लोग वहां अच्छा कर रहे हैं. वैसे भी त्रिनिदाद और टोबैगो में प्रति व्यक्ति आय 21 हज़ार अमरीकी डालर है, जो वहां की आर्थिक संपन्नता को जाहिर करती है.

उन्होंने बताया कि सरकार और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच बातचीत में ये सहमति बनी है कि एक मैपिंग जरूरी है, जिससे यह जाना जा सके कि झारखंड के लोग कहां-कहां अच्छा कर रहे हैं और इस राज्य के लिए वे क्या योगदान कर सकते हैं. सरकार ने तय किया है कि झारखंड में निवेशकों और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां की संस्कृति, संसाधन, क्षमता, पर्यटन से जुड़े ऑडियो- वीडियो तैयार कर सभी दूतावासों को उपलब्ध कराए जाएंगे.

विश्वदीप डे ने बताया कि उन्होंने फ्रेंड्स ऑफ झारखंड एसोसिएशन के गठन का प्रस्ताव भी दिया है. वे मानते हैं कि इसके माध्यम से झारखंड से संबंधित सूचना के ईमेल पर आदान प्रदान होने से भावनात्मक संबंध प्रगाढ़ होंगे.

वे कहते हैं कि बात सिर्फ निवेश और राजनीतिक, आर्थिक संबंधों की नहीं, भावनात्मक रिश्ते प्रगाढ़ करने की है.

उन्होंने बताया कि भारत सरकार उन देशों में हिंदी का प्रचार- प्रसार जोर शोर से कर रही है. झारखंड, बिहार जैसे हिंदी पट्टी इलाकों में कौशल विकास की असीम संभावनाएं हैं. विदेशों में कौशल विकास के जरिए रोजगार के अवसर ज्यादा हैं. इस दिशा में झारखंड सरकार से कई पहलुओं पर बात हुई हैं.

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