शिवराज के शहर में पानी के लिए धारा 144

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मध्यप्रदेश में बुंदेलखंड इलाका पानी की भारी क़िल्लत का सामना कर रहा है. लेकिन राज्य के दूसरे इलाकों में भी हालात ज़्यादा अच्छे नहीं है.

राजधानी भोपाल के क़रीब सीहोर और रायसेन ज़िलों में लोगों को तपती गर्मी में पानी के लिए भारी मशक्क़त करनी पड़ रही है.

इन ज़िलों के शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी हालात ख़राब है. कुछ इलाक़ों में हालत ऐसी है कि लोगों को चार-पांच दिन में एक बार ही पानी नसीब हो रहा है.

कई इलाक़ों में तो लोगों को कई-कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह ज़िले सीहोर के इच्छावर में पानी की क़िल्लत के चलते धारा 144 लगा दी गई है.

ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लोग टूल्लू पंप का इस्तेमाल कर पानी न खींच सकें और सब को पानी मिल सकें. अगर कोई भी पंप का इस्तेमाल करता पाया गया तो उसका कनेक्शन काट कर उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जाएगा.

सीहोर ज़िले के आष्टा तहसील का भी यही हाल है. शहर से गुजरने वाली पार्वती नदी पूरी तरह से सूख चुकी है. शहर का ग्रामीण इलाका भी पानी के लिए तरस रहा है.

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आष्टा के खाचरोद गांव की आबादी 2200 है लेकिन गांव में मात्र दो पंप काम कर रहे हैं जिससे पूरा गांव इस वक़्त अपनी जरूरत पूरी कर रहा है.

पेशे से किसान गांव के कैड़ात सिंह बताते हैं, “पूरे गांव की हालत ख़राब है. आप देख ही रहे हो कि गांव के सभी कुंए सूख चुके हैं.”

वो आगे कहते हैं, “लोगों के पास पीने का पानी नहीं है फसल के बारे में तो सोच ही नही सकते. जिन्होंने भी प्याज़ लगाई थी वो सब सूख गई. अब तो लोग बस पीने के पानी की तलाश में लगे रहते हैं.”

इस क्षेत्र के दूसरे गांव जैसे नरपाखेड़ी, पद्मसी और उमरदड़ के भी हालात बहुत ख़राब हैं. लोगों को बड़ी मुश्किल से पीने का पानी नसीब हो पा रहा है.

पानी नहीं होने की वजह से ज़्यादातर खेत ख़ाली नज़र आ रहे हैं, वहीं अधिकतर हैंडपंप या तो जवाब दे चुके हैं या फिर बड़ी मुश्किल से पानी निकल रहा है.

नरपाखेड़ी के भैरव सिंह भी पानी की तलाश में बैलगाड़ी में टंकी लेकर निकले हैं. वो मानते हैं कि हालात इस बार बहुत बदतर है.

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वो कहते हैं, “पानी एक-दो किलोमीटर दूर जाकर लाना पड़ता है वो भी बड़ी मुश्किल में मिलता है.”

वहीं भोपाल से लगा रायसेन ज़िला भी पानी की कमी से जूझ रहा है.

लोगों को पानी के टैंकर का इंतज़ार करते हुए हर जगह देखा जा सकता है. शहर में कहीं पानी दो दिनों पर तो कहीं चार दिनों पर मिलता है. कई इलाकों में लोग अब पूरी तरह टैंकर पर निर्भर है.

मजदूरी करने वाले कंछेदी लाल बताते हैं, “पानी की वजह से काम पर नहीं जा पा रहे हैं. अगर काम पर गए तो पानी ही नहीं मिलेगा. वहीं टैंकर आने पर पानी के लिए रोज़ लड़ाई झगड़े होते हैं.”

हालत ये है कि कई जगह लोग पानी के बर्तन सुबह से लाइन में लगा देते है, ताकि टैंकर आने पर उन्हें पानी मिल सकें.

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