भारत ने की थी पैसे की पेशकश: मसूद अज़हर

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नई दिल्ली से छपने वाले अख़बारों में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर के दावे, समझौता एक्सप्रेस बम ब्लास्ट मामले में पाकिस्तान में गवाहों को समन, हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन और मथुरा में जवाहर बाग़ की ख़बरों को प्रमुखता से जगह मिली है.

इंडियन एक्सप्रेस ने जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अज़हर के दावे को प्रमुखता से प्रकाशित किया है. अज़हर का दावा है कि भारत सरकार ने कंधार विमान अपहरण कांड के बाद तत्कालीन तालिबान सरकार को उन्हें और उनके दो साथियों को गिरफ़्तार कर भारत को दोबारा सौंपने के लिए पैसों की पेशकश की थी.

इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी-814 को 1999 में अग़वा कर अफ़ग़ानिस्तान के कंधार ले जाया गया था. भारत सरकार ने यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की रिहाई के बदले जेल में बंद मौलाना मसूद अज़हर सहित तीन चरमपंथियों को रिहा किया था.

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अज़हर ने दावा किया है कि तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने तालिबान के उड्डयन मंत्री मुल्ला अख़्तर मोहम्मद मंसूर के सामने कथित पेशकश की थी.

मुल्ला अख़्तर मोहम्मद मंसूर की मौत हाल ही में अमरीकी ड्रोन हमले में हो गई है.

हालांकि इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के तत्कालीन प्रमुख एएस दुलत ने कहा है कि इस पूरे मामले में कहीं भी पैसों की बात नहीं हुई थी.

वहीं उस समय विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान-ईरान-अफ़ग़ानिस्तान डेस्क देख रहे पूर्व अधिकारी विवेक काटजू ने मसूद अज़हर के दावे को ग़लत बताया है.

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'द पायनियर' ने लिखा है कि हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है. 20 हज़ार सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं. संवेदनशील इलाक़ों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.

'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' लिखता है कि जाट आंदोलन को देखते हुए दिल्ली के आस पास के इलाक़ों में भी सुरक्षा इंतज़ाम का जायज़ा लिया जाएगा.

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समझौता एक्सप्रेस में 2007 में हुए ब्लास्ट के मामले में पाकिस्तान से गवाहों को बयान देने के लिए भारत बुलाया जाएगा. 'द हिंदू ' ने लिखा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुरोध पर हरियाणा की अदालत 13 लोगों के लिए समन जारी करेगी.

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में 68 लोगों की मौत हो गई थी, आरएसएस के नेता स्वामी असीमानंद इस मामले के मुख्य अभियुक्त बनाए गए हैं.

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मथुरा के जवाहर बाग़ में हुई हिंसा की जांच रविवार को शुरू हो गई. जनसत्ता लिखता है कि केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा नेता साध्वी निरंजना ज्योति ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री शिवापल सिंह यादव पर मुक़दमा दर्ज करने की मांग की है.

वहीं शिवपाल सिंह यादव का कहना है कि भाजपा नेता बिना सबूत के आरोप न लगाएं.

इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि स्वाधीन भारत सुभाष सेना के अंदरूनी राज़ जवाहर बाग़ में मिली आधी जली किताब में दर्ज हैं.

अख़बार को मिले 10-12 पन्नों से पता चलता है कि सुभाष सेना को गुजरात और ओडीशा जैसी जगहों से पैसा मिलता था.

हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि रविवार को मीडिया के लिए जवाहर बाग़ का दरवाज़ा खोला गया. वहां स्टोर रूम में राशन भरा हुआ था, बिजली के लिए सौर ऊर्जा पैनल बनाया गया था.

वहीं, इस मामले के मुख्य अभियुक्त रामवृक्ष यादव के गांव रायपुर बागपुर के लोगों ने उनका शव लेने से इनकार कर दिया है.

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इंडियन एक्सप्रेस राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा है कि भारत में ईसाइयों, दलितों और आदिवासियों में सबसे ज़्यादा ख़ुदक़ुशी के मामले होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में एक ईसाई की ख़ुदक़ुशी करने की आशंका किसी हिंदू से डेढ़ गुना ज़्यादा होती है.

गृह मंत्रालय ने इंडियन एक्सप्रेस के एक आरटीआई आवेदन पर यह जानकारी दी है.

यह रिपोर्ट 2014 में इकट्ठा किए गए आंकड़ों के आधार पर बनी है, 2015 में इसे जारी किया जाना था लेकिन गृह मंत्रालय ने इसे सार्वजनिक नहीं किया.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि सरकार ने एक हाइकोर्ट के चीफ़ जस्टिस की नियुक्ति की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफ़ारिश को दूसरी बार ख़ारिज कर दिया है.

चीफ़ जस्टिस की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने एक महत्त्वपूर्ण राज्य के हाई कोर्ट के लिए चीफ़ जस्टिस के नाम की सिफ़ारिश की थी, इस राज्य में विपक्षी पार्टी सत्ता में है.

सरकार ने इसे ख़ारिज कर दिया, कॉलेजियम ने दोबारा सिफ़ारिश कर दी जिससे सरकार जज की नियुक्ति के लिए बाध्य है.

हालांकि सरकार ने कोलेजियम को फ़ैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के कम से कम दो जजों ने प्रस्तावित नाम पर आपत्ति जताई थी.

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक़ दिल्ली का भविष्य बसें हैं. एक पैनल ने अध्ययन के बाद कहा है कि गाड़ियों को ज़्यादा बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए.

दिल्ली में ट्रैफ़िक की समस्या को देखते हुए पब्लिक ट्रान्सपोर्ट ही एक सामाधान है.

वहीं इसी विषय पर द हिंदू की एक ख़बर के मुताबिक़ इसके लिए दिल्ली को 19,762 करोड़ रुपए ख़र्च करने पड़ेंगे.

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