विदेशी दौरों पर मोदी का 'एक ही राग'

  • 6 जून 2016
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों के दौरान भारतीय राजनीति और ख़ासतौर पर विपक्ष के बारे में की गई टिप्पणियों पर फिर बहस छिड़ी है.

सोमवार को क़तर की राजधानी दोहा में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने फिर से विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर निशाना साधा۔

उन्होंने कहा, "मुझे दिक्कतें आई हैं क्योंकि मैंने लोगों की मिठाइयां बंद करवा दी हैं और सरकारी स्कीमों और परियोजनाओं में धांधलियां रुकवाने से सालाना 36,000 करोड़ रुपए की बचत हो रही है. लेकिन अभी हमने भ्रष्टाचार की ऊपरी सतह को ही साफ़ किया है और भीतर से सफ़ाई अभी शेष है."

नरेंद्र मोदी के इस बयान की कांग्रेस ने निंदा की है और कहा है कि विदेश में भारतीय विपक्ष की लगातार निंदा करते रहना अब निराशाजनक होता जा रहा है.

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कांग्रेस सांसद और विदेश मामलों के जानकार शशि थरूर ने बीबीसी से कहा, "भारत का इतिहास रहा है कि प्रधानमंत्री अपने विदेशी दौरों में अंदरूनी राजनीति घर में छोड़ कर जाते हैं और वहां वे सभी भारतीयों का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं. विदेशों में मोदी के भारतीय समुदाय को संबोधित करने के पीछे घरेलू राजनीति तो है ही. लेकिन उनको ये सीखना पड़ेगा कि जब वे विदेश में होते हैं तो अपने चुनावी प्रचार के अंदाज़ से बाहर निकलें."

हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस तीखी आलोचना पर पलटवार करते हुए कहा है कि भारत में पहले भ्रष्टाचार था और ये सभी को पता है, तो फिर ग़लत बात कहा हैं.

भाजपा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बीबीसी को बताया, "भारत में पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेश कौन लेकर आया है? भारत में आर्थिक उन्नति की रफ़्तार बढ़ी है कि नहीं? अगर प्रधानमंत्री पुरानी सरकार की ग़लतियों को सुधार रहे हैं तो इसकी निंदा करने का कोई मतलब नहीं बनता."

पिछले दो वर्षों में मोदी के 40 से भी ज़्यादा विदेश दौरे हो चुके हैं और वहां पर दिए गए भाषणों में से कई में मोदी ने विपक्ष पर 'तल्ख़ टिप्पणियां' भी की हैं.

यही वजह है कि भारत में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस तरह के बयानों की खुलकर निंदा की है.

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एक नज़र विदेश दौरों में प्रधानमंत्री मोदी के कुछ भाषणों पर:

1. सितंबर 2015, कैलिफोर्निया, अमरीका में मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का नाम लिए बिना एक टिप्पणी की.

"हमारे देश में राजनेताओं के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों को सामने आने में ज़्यादा दिक़्क़त नहीं आती. किसी ने 50 करोड़ रुपए बनाए, किसी के बेटे ने 250 करोड़ बनाए, किसी की बेटी ने 500 करोड़ रुपए बनाए और किसी के दामाद ने 1000 करोड़ रुपए बनाए."

2. अप्रैल 2015 टोरंटो, कनाडा में उन्होंने एक भाषण में विपक्षी कांग्रेस का नाम लिए बिना टिप्पणी की.

"जिनको गंदगी ख़त्म करनी थी, गंदगी कर के चले गए, हम सफ़ाई करने जाएंगे. पिछले 60 वर्षों की धूल हम साफ़ करेंगे. भारत एक विशाल देश है जहाँ समस्या पुरानी है और सफाई में समय लगेगा, लेकिन हमारा मिशन स्किल इंडिया का है न कि स्कैम इंडिया का."

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3. मई 2015 चीन की यात्रा के दौरान मोदी ने जो बयान दिया उसे उन्हीं दिनों लगभग डेढ़ महीने का 'ब्रेक' लेकर लौटे राहुल गांधी से जोड़ कर देखा गया.

"पिछले 30 वर्षों के अधूरे पड़े काम को मैं पूरा कर रहा हूँ. पिछले एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान मैंने एक दिन भी छुट्टी नहीं ली है, दिन-रात काम किया है. क्या मैं छुट्टी पर गया? क्या मैं सुस्ताता हूँ? क्या मैं अपने वादों को पूरा नहीं कर रहा हूँ?"

बहरहाल, जब भी मोदी के विदेशी धरती पर इस तरह के बयान सुनने को मिले हैं, कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों ने भी इसकी कड़ी आलोचना की है.

अक्सर इन बयानों से संसद में काम-काज भी ठप रहा है.

फिलहाल नरेंद्र मोदी अफ़ग़ानिस्तान, क़तर, स्विट्ज़रलैंड, अमरीका और मेक्सिको के दौरे पर हैं.

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