ऑपरेशन ब्लूस्टार की बरसी, यादें हुईं ताज़ा

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आज ऑपरेशन ब्लूस्टार की 32वीं बरसी है.

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32 वर्ष पहले आज ही के दिन अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना ने दमदमी टकसाल के प्रमुख और पंजाब में पृथकतावादी अभियान चला रहे उनके प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले को उनके सैंकड़ों हथियारबंद साथियों के साथ ख़त्म कर दिया था.

आज भी पंजाब में एक समूह जरनैल सिंह को शहीद नेता के रूप में देखता है. जिसकी वजह से हर वर्ष पंजाब में ख़ासकर अमृतसर में आज के दिन कुछ तनाव रहता है.

इसबार अमृतसर में तनाव देखा जा रहा है इसलिए सरकार ने यहां सुरक्षा के ख़ास इंतज़ाम किए हैं.

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पिछले एकवर्ष में पंजाब में कथिततौर पर गुरूग्रंथ साहब की बेज़्ज़ती किए जाने से लेकर, दो गुटों के बीच गोलीबारी की घटना, कुछ कट्टरपंथियों का आना और उनके जमा होने के मद्देनज़र सरकार ने सुरक्षा के ख़ास इंतज़ाम किए हैं.

सरकार ने 8000 पुलिसकर्मियों को अकेले अमृतसर में लगाकर इसे छावनी में तब्दील कर दिया है. इसके अलावा लुधियाना और पटियाला में सीआरपीएफ़ और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

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जबकि ख़ालसा संगठन ने पंजाब बंद की मांग की है.

20 साल तक बुरे दौर से गुज़र चुके पंजाब में अभी तक शांति है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि ऑपरेशन ब्लूस्टार जैसे मौक़ा अलगाववादियों को एक बार फिर से सिर उठाने में मदद करेगा.

पिछले चार साल से स्वर्ण मंदिर में ख़ालिस्तान के समर्थन में नारे लगते रहे हैं.

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ख़ालिस्तान को बढ़ावा दे रहे हैं अमृतसर अकालीदल के प्रधान और अलगाववादी के रूप में पहचान रखने वाले सिमरनजीत सिंह मान.

सिमरनजीत सिंह अपने समर्थको के साथ ख़ालिस्तान का नारा लगा कर माहौल को गर्म बना रहे हैं.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से स्थानीय पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन की बातचीत पर आधारित)

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