खाड़ी देशों में पाकिस्तानी मज़दूरों की मांग कम

  • 7 जून 2016
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पाकिस्तान की मौजूदा सरकार का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार साढ़े 21 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है. लेकिन खाड़ी देशों में नौकरी के अवसरों में हाल में आई कमी से विदेशी मुद्रा भंडार में कमी की आशंका पैदा हो गई है.

एहतेशाम हाफीज़ उन पाकिस्तानियों में से एक हैं जिन्होंने नौकरी करने के लिए मध्य-पूर्व के देशों का रुख़ किया था.

साढ़े तीन साल तक सऊदी अरब की एक निजी कंपनी में नौकरी करने के बाद कुछ महीने पहले उनकी नौकरी चली गई. इसके बाद उन्हें वापस पाकिस्तान आना पड़ा.

एहतेशाम आजकल बेरोज़गार हैं और नौकरी खोज रहे हैं. उनका कहना है कि सऊदी अरब में अब रोज़गार बहुत कम हैं.

उनका कहना है, "सऊदी में अब हालात पहले जैसे नहीं रहे. पहले वेतन अच्छा था लेकिन अब काम बढ़ गया है और वेतन आधा कर दिया गया है. मैं तो वहां से निराश होकर वापस आ गया हूं."

एहतेशाम ने बताया कि उनकी कंपनी से आठ से दस लोगों को एक साथ नौकरी छोड़कर अपने देश लौटना पड़ा है.

तेल के पैसे से मालामाल मध्य पूर्व के देशों को पाकिस्तान के कम पढ़े-लिखे लेकिन हुनरमंद लोगों के लिए अवसरों से भरा हुआ बाज़ार माना जाता था. लेकिन अब हालात बदल गए हैं.

विश्व के बाज़ार में तेल की क़ीमतों में आई कमी से सऊदी अरब जैसे तेल की आय पर निर्भर रहने वाले देशों का नुक़सान बढ़ा है. इस वजह से विकास के कामों पर ख़र्च में कटौती की गई है.

यही कारण है कि बड़ी-बड़ी निर्माण कंपनियों में रोज़गार के अवसर पैदा नहीं हो रहे हैं.

हुनरमंद पाकिस्तानियों को विदेशों में नौकरी दिलवाने वाली कंपनियों के मुताबिक़ खाड़ी देशों और सऊदी अरब में पाकिस्तानी मज़दूरों की खपत कम हुई है.

ऐसी ही एक कंपनी के मालिक असद कियानी कहते हैं कि सऊदी अरब की बड़ी कंपनियों में नौकरियां अब नहीं बची हैं. कुछ बड़ी कंपनियां तो अपने कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रही हैं.

असद कयानी के मुताबिक़ पाकिस्तान से बहुत अधिक लोग बाहर जाना चाहते हैं, लेकिन बाहर अब ज़्यादा नौकरियां नहीं हैं.

नौकरी के मक़सद से बाहर काम करने वाले पाकिस्तानियों में बड़ी तदाद मध्य-पूर्व के देशों में काम करने वालों की है.

पाकिस्तान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ सिर्फ़ 2014 में कुल मिलाकर सात लाख 31 हज़ार 639 लोग सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी देशों में नौकरी के लिए गए.

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विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी हर साल अरबों डॉलर पाकिस्तान भेजते हैं. यह रक़म पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इज़ाफ़ा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है.

मौजूदा वित्त वर्ष में जुलाई से अप्रैल के दौरान बाहर के देशों से 16 अरब डॉलर की रक़म पाकिस्तान आई है. इनमें सऊदी अरब समेत मध्य-पूर्व के देशों से भेजी गई रक़म दस अरब 33 करोड़ डॉलर की है.

मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में बाहर के देशों से आने वाली रक़म में सबसे अधिक चार अरब 83 करोड़ डॉलर सऊदी अरब से आए हैं. लेकिन पिछले तीन महीनों में सऊदी अरब से आने वाली इस रक़म में कमी आई है.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आर्थिक मंदी और घाटे की वजह से नौकरियों में आई कमी से पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो सकता है.

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अर्थशास्त्री डॉक्टर आबिद सलहरी का कहना है कि खाड़ी देशों में रहने वाले ज़्यादातर पाकिस्तानियों को वहां की नागरिकता नहीं मिलती और ज़्यादातर के परिवार पाकिस्तान में रहते हैं, इसलिए वहां मौजूद ज़्यादातर लोग अपनी आमदनी पाकिस्तान भेजते हैं.

डॉक्टर सलहरी के मुताबिक़ बाहर के देशों से भेजी गई रक़म विदेशी मुद्रा का मुख्य स्रोत है. लेकिन इसके लिए किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है. इसके लिए ज़रूरी है कि पाकिस्तान के कामगारों की मांग दूसरे देशों में भी पैदा हो.

उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा के लिए बाहर से आने वाली रक़म पर निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि दुनिया में नीतियां बदलती रहती हैं. पाकिस्तान को लेकर दूसरे देश अमूमन अपनी विदेशी नीति सख़्त रखा करते हैं.

पाकिस्तान के केंद्रिय बैंक ने चेतावनी दी है कि वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि और बाहर से आने वाली रक़म में कमी घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि इस हालात में विदेशी मुद्रा के लिए केवल बाहर से आने वाली रक़म पर निर्भर रहने की बजाए निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार पर ज़ोर देना चाहिए.

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