इतनी बेहाल क्यों है बिहार पुलिस?

  • 8 जून 2016
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अपराध पर अंकुश न लगा पाने को लेकर बिहार पुलिस की अक्सर आलोचना होती है.

पिछले दिनों रोड रेज़ में एक छात्र की हत्या और उसके कुछ दिन बाद ही एक पत्रकार की हत्या ने बिहार पुलिस की क्षमताओं पर कई सवाल खड़े कर दिए.

प्रदेश में पुलिस सुधार और ट्रेनिंग को लेकर भी कई सवाल हैं.

हालांकि बिहार पुलिस में यूँ तो क़रीब 80 हज़ार सिपाही, 10 हज़ार एसआई-एएसआई और 250 डीएसपी हैं, लेकिन पुलिस ट्रेनिंग स्कूल सिर्फ़ एक है, भागलपुर के नाथनगर में.

15 नवंबर, 2000 को बिहार- झारखंड बंटवारे के बाद मुख्य प्रशिक्षण संस्थान झारखंड में चले गए. इनमें हजारीबाग के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज और पदमा में मिलिट्री पुलिस ट्रेनिंग सेंटर और जमशेदपुर का ट्रैफ़िक ट्रेनिंग स्कूल शामिल है.

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हालत ये है कि विभाजन के बाद 2000 से 2009 तक डीएसपी पद पर दो बैच की नियुक्ति हुई, जिसका प्रशिक्षण पंजाब के फिल्लौर में पुलिस अकादमी, हरियाणा पुलिस अकादमी, मनेसर समेत मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कराया गया.

2014 में पटना में प्रशिक्षण मुख्यालय किराए के भवन में शुरू किया गया, जबकि बंटवारे के बाद 2009 में जाकर 206 करोड़ रुपए आवंटित कर बिहार पुलिस अकादमी का गठन हुआ.

राज्य में पुलिसबलों की ट्रेनिंग को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, हजारीबाग के रहे प्राचार्य डीएन गौतम बताते हैं, "बिहार विभाजन के छह साल पहले 1994 में दरोगा (एसआई) के 1640 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी. उनमें से 225 से ज़्यादा लोग शारीरिक माप में खरे नहीं उतरे."

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वो कहते हैं, "इतने लोगों को ट्रेनिंग से पहले ही अयोग्य क़रार दिए जाने के सप्ताह भर बाद ही मेरा तबादला कर दिया गया और सभी को ट्रेनिंग की खानापूर्ति कर दरोगा बना दिया गया. ट्रेनिंग के प्रति इच्छाशक्ति का अंदाज़ा इस प्रकरण से लगाया जा सकता है."

वर्तमान की बात करें तो 2012- 13 तक बिहार पुलिस अकादमी का भवन राजगीर में बनाने का लक्ष्य तो रखा गया, लेकिन यह भवन अब भी निर्माणाधीन है.

हालाँकि, राज्य के डीजीपी (ट्रेनिंग) केएस द्विवेदी कहते हैं, "फिलहाल हम 11,900 सिपाहियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं. संख्या अधिक होने के कारण इनको राज्य के 34 अलग-अलग बिहार मिलिट्री पुलिस और पुलिस लाइन में प्रशिक्षित कर रहे हैं."

वे कहते हैं, "विभाजन के बाद अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए अकादमी बनाने में देरी हुई, लेकिन एक ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट राजगीर में बन रहा है. अब, डुमराव और सिमुलतला में बिहार पुलिस के कॉन्स्टेबल के लिए निर्माण कार्य चल रहा है."

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लेकिन मिलिट्री पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, डुमराव में निर्माण 2008 से ही जारी है, तो सिमुलतला में सरकार को अभी ज़मीन तक नहीं मिल पाई है.

बिहार के पूर्व डीजीपी गौतम मानते हैं कि ट्रेनिंग के नाम पर आज भी लापरवाही बरती जा रही है.

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