अख़लाक़ और गोश्त से जुड़े छह सवाल

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गोहत्या और गोमांस खाने की अफ़वाह पर पिछले साल सितंबर में भीड़ के हाथों मारे गए मोहम्मद अख़लाक़ के घर से पुलिस ने कोई गोश्त बरामद नहीं किया था.

बीबीसी से विशेष बातचीत में दादरी के डीएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि अख़लाक़ के घर या फ़्रिज से गोश्त का कोई सैंपल कभी भी लिया ही नहीं गया था.

हाल में सामने आई एक रिपोर्ट में सामने आया है कि गोश्त के सैंपल गाय वंश से हैं.

एक नज़र इस मामले से जुड़े अहम सवालों पर:

विवादित गोश्त पुलिस को कहां मिला?

डीएसपी अनुराग सिंह के मुताबिक, “हमने अख़लाक़ के घर से 100 मीटर की दूरी पर, जहां अख़लाक़ को पीटा गया था, वहीं से गोश्त के सैंपल लिए थे.”

सिंह ने बताया कि अख़लाक़ के घर से कोई सैंपल नहीं लिए गए.

गोश्त के कितने सैंपल टेस्ट किए गए?

पुलिस के मुताबिक़ गोश्त के सैंपल एक ही बार लिए गए. ये सैंपल पहले दादरी के सरकारी वेटनरी अस्पताल भेजे गए.

वहां जांच के बाद अस्पताल ने नतीजे की ‘पुष्टि’ के लिए वही सैंपल मथुरा की फ़ोरेंसिक लैब भेजे.

सैंपल की जांच में क्या पता चला और जांच में इतना फ़र्क क्यों?

दादरी के अस्पताल की 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक ‘फ़िज़िकल एग्ज़ामिनेशन’ के बाद ये पाया गया कि ये गोश्त ‘बकरी या उसके वंश’ का है.

तीन अक्तूबर को मथुरा की फ़ोरेंसिक लैब में तकनीकी जांच के बाद इससे एकदम अलग नतीजा सामने आया और रिपोर्ट ने कहा कि गोश्त ‘गाय या उसके वंश’ का है.

रिपोर्ट आने में देरी क्यों हुई?

अस्पताल की जांच रिपोर्ट अख़लाक़ की हत्या के फ़ौरन बाद ही सामने आ गई लेकिन मथुरा की लैब की रिपोर्ट तीन अक्तूबर को तैयार होने के बावजूद दिसंबर में भेजी गई.

लैब के इंचार्ज डॉ. एचसी सिंह ने बीबीसी को बताया कि ऐसा लैब में डाक टिकट की कमी होने की वजह से हुआ.

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रिपोर्ट से केस का क्या रिश्ता है?

हाल ही में रिपोर्ट तब सार्वजनिक हुई जब अभियुक्तों के वकीलों की दरख़्वास्त पर अदालत ने पुलिस को इसकी कॉपी कोर्ट में जमा करने को कहा.

हालांकि अदालत ने ये कहा कि रिपोर्ट का हत्या के केस से कोई ताल्लुक नहीं है और उसकी कॉपी आरोपियों के उस हक़ को ध्यान में रखते हुए दी जा रही है, जिसके तहत उन्हें केस से जुड़े सभी दस्तावेज़ देखने का अधिकार है.

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क्या उत्तर प्रदेश में 'बीफ़' ख़ाना अपराध है?

राज्य में गाय, बछड़ा, बैल और सांड की हत्या करना अपराध है. हालांकि भैंस को मारा जा सकता है और उसका गोश्त खाने पर भी कोई पाबंदी नहीं है.

भैंसों के कई स्लॉटर हाउस लाइसेंस के साथ उत्तर प्रदेश में काम कर रहे हैं.

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