अख़लाक़ के परिवार ने दादरी याचिका को कोरा 'झूठ' बताया

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अख़लाक़ के परिवार ने कथित गोहत्या मामले में दायर अदालती याचिका को कोरा ‘झूठ’ बताया है.

ग्रेटर नोएडा अदालत में दायर इस याचिका में बिसाहड़ा गांव के एक व्यक्ति सूरजपाल की ओर से तीन प्रत्यक्षदर्शियों का भी ज़िक्र किया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर गाय के बछड़े को पीटते और मारते हुए देखा था.

रिपोर्टों के मुताबिक़ याचिका में प्रेम सिंह नाम के एक व्यक्ति का भी ज़िक्र है, जिन्होंने कथित तौर पर अख़लाक़ को गोहत्या करते हुए देखा.

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वो पुलिस को आदेश दे कि अख़लाक़ के परिवार के खिलाफ़ गोहत्या का मामला दर्ज किया जाए.

ये मांगें तभी से उठने लगी थीं, जब से मथुरा फ़ोरेंसिक लैब रिपोर्ट में अख़लाक़ के शव के पास से बरामद मीट को गोमांस बताया गया था.

पुलिस के मुताबिक़ सितंबर 2015 को कथित गोहत्या पर गुस्साई एक भीड़ ने दादरी में मोहम्मद अख़लाक़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

इस घटना में अख़लाक़ के बेटे दानिश को भी चोटें आई थीं. कुछ रिपोर्टों में इस घटना को सोची समझी साज़िश भी बताया गया था.

बीबीसी से बातचीत में अख़लाक़ के छोटे भाई जान मोहम्मद ने कहा, “ये आरोप 100 प्रतिशत निराधार, झूठे हैं, जो कभी भी साबित नहीं हो सकते.”

जान मोहम्मद कहते हैं, “कोई साबित कर दे कि मैं गाँव में हूं. मेरी फ़ोन लोकेशन (जांच लें). मैं उस दिन बीमार था. अस्पताल में भी भरती हुआ था. मैंने एक पैथोलॉजी लैब से डेंगू की जाँच भी कराई थी. मेरी लोकेशन गाँव में सुबह पाँच बजे से छह बजे तक है. मैं पूछना चाहूंगा कि क्या प्रेम सिंह की लोकेशन 12.30 बजे बिसाहड़े की है?”

याचिका में प्रेम सिंह के इस दावे पर कि उन्होंने अख़लाक़ को गोहत्या करते हुए देखा, इस पर जान मोहम्मद का कहना है, “प्रेम सिंह कहते हैं कि उन्होंने देखा है. मैं कहता हूं कि प्रेम सिंह या कोई आदमी जहाँ एक गरीब मुस्लिम परिवार रहता हो, उससे इतना नहीं डरता है कि किसी को घटना के बारे में ही न बताए.”

लेकिन गाँववालों ने याचिका दायर करने में इतना वक़्त क्यों लगाया?

गाँव वालों के वकील राम सरन नागर ने बीबीसी को बताया, “जब ये घटना हो गई तो पुलिस ने गाँव में तांडव मचाया. उन्होंने निर्दोष लोगों को बंद करना शुरू कर दिया.”

नागर हिरासत में रखे गए गाँव के युवकों को “मासूम, निर्दोष” बच्चे बताते हैं.

इस पर जान मोहम्मद कहते हैं, “अख़लाक़ की हत्या हुई है. दानिश को मारा गया है. अख़लाक़ धुआँ बनकर हवा में नहीं उड़ा. कोई तो दोषी होगा. हत्या हुई है. दानिश को घायल किया गया. मेरी 85 साल की माँ को मारा गया है. ये सब कुछ हुआ है. इसे नहीं नकारा जा सकता है. इन्हें लगता है कि जान मोहम्मद की वजह से केस हाइलाइट हुआ है. इसे लपेट लो, जबकि पैरोकारी उनका बेटा सरताज कर रहा है. वो बालिग है, समझदार है, नौकरीपेशा व्यक्ति है.”

कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 13 जून को है.

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