कछुए को लगाये पहिये और...

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तमिलनाडु का अरिंगर अन्ना जूलोजिकल पार्क भारत का पहला और सबसे बड़ा चिड़ियाघर है जिसकी स्थापना 1855 में हुई थी.

इस पार्क में 81 परिसर हैं और स्तनपायी, चिड़िया और सरिसृप वर्गों की 170 से ज़्यादा प्रजातियां हैं.

लेकिन इस समय यहां मुख्य आकर्षण का केंद्र है 10 इंच का एक मादा कछुआ, जिसे प्रोस्थेटिक पहिया लगाने में चिकित्सकों को सफलता मिली है.

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यहां कुल 14 कछुए हैं, लेकिन पहिए से लैस मादा कछुआ इनमें स्टार है क्योंकि वो भी अब चलने फिरने में सक्षम है.

इस कछुए के आगे वाले पैर घायल हो गए थे और उसे चलने में परेशानी का समाना करना पड़ रहा था.

चिड़ियाघर में जानवारों की देख रेख करने वाले कर्मचारियों को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने चिकित्सकों को सूचना दी.

काफ़ी सोचने के बाद उन्होंने कछुए के शरीर से पहिया जोड़ने की जुगत लगाई ताकि उसे चलने में आसानी हो.

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इन पहियों को लगाने वाले डॉ बून एल्विन ने बताया, "बाकी कछुओं से वो अलग थलग न पड़ जाए, हमारी मुख्य चिंता यही थी. लेकिन इन पहियों के साथ उसके ग्रुप ने उसे बिना किसी परेशानी के स्वीकार कर लिया."

उनके मुताबिक़, "हमने चिपकने वाले एक ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल किया, जिसका कोई साइड इफ़ेक्ट न हो."

चिड़ियाघर के चिकित्सकों ने ऐसे छोटे छोटे पहियों का इस्तेमाल किए जिनका इस्तेमाल खिड़कियों को सरकाने में किया जाता है.

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यह पूरी प्रक्रिया बहुत साधारण थी और महज आधे घंटे में पूरी हो गई.

डॉ बून कहते हैं कि यह कछुआ बहुत छोटा है लेकिन अब यह अपने दूसरे साथियों से तेज़ भाग सकता है.

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