मोदी जी जो बदला लेना है, मुझसे लो: केजरीवाल

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के फ़ैसले का बचाव किया है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले कांग्रेस और बीजेपी की सरकारों ने भी संसदीय सचिव बनाए थे.

विपक्ष 'लाभ के पद' का हवाला देते हुए इन 21 विधायकों की सदस्यता को रद्द करने की मांग कर रहा है.

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने दिल्ली सरकार के उस क़ानूनी संशोधन को ख़ारिज कर दिया जिसमें संसदीय सचिव को लाभ के पद की परिभाषा से अलग रखा गया है.

संसदीय सचिव बनाए जाने के ख़िलाफ़ एक जनहित याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में भी लंबित है.

लेकिन केजरीवाल का कहना है, "2014 तक भाजपा और कांग्रेस संसदीय सचिव बनते थे तो संवैधानिक था और आम आदमी पार्टी ने बनाए तो अंसवैधानिक हो गया."

उन्होंने पूर्व में ससंदीय सचिव रहे कांग्रेस नेता अजय माकन और कई अन्य नेताओं के नाम भी गिनाए.

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार इन 21 संसदीय सचिवों के ज़रिए अपने विकास कार्यों को कर रही हैं और सरकार से बिना कोई पैसा लिए ये लोग दिल्ली में घूम घूम बताते हैं कि कहां काम करने की ज़रूरत है.

लेकिन कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि संसदीय सचिव का काम सिर्फ़ विधायिका संबंधी कार्य में मदद करना होता है.

उन्होंने बुधवार को एक प्रेस कान्फ्रेस कर 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने पर केजरीवाल की कड़ी आलोचना की.

भाजपा भी इस मुद्दे पर केजरीवाल को घेर रही है.

लेकिन केजरीवाल ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फिर निशाना है, "जो बदला लेना है मुझसे ले लो, लेकिन दिल्ली में जो काम हो रहा है उसे मत रोकिए."

केजरीवाल ने ये भी कहा कि इन संसदीय सचिवों को अलग से कोई वेतन या भत्ता नहीं दिया जा रहा है.

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