'इशरत जहां फ़ाइल से काग़ज़ ग़ायब हुए थे'

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Image caption इशरत जहां का परिवार इंसाफ की मांग करता रहा है

गुजरात में इशरत जहां फ़र्ज़ी मुठभेड़ की जांच करने वाली एक सदस्यीय समिति ने कहा है कि इस मामले से जुड़े कुछ काग़ज़ों को जाने या अनजाने तरीके से हटाया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इन काग़ज़ों को सिंतबर 2009 में हटाया गया था और उस समय पी चिंदबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे.

गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बीके प्रसाद ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि मंत्रालय में जो पांच दस्तावेजों थे उनमें से सिर्फ़ एक पन्ना मिला है.

ये रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव राजीव महर्षि को सौंपी गई है.

रिपोर्ट कमिटी ने कहा है, "ये साफ़ है कि दस्तावजों को जानबूझकर या फिर अनजाने में हटाया गया."

हालांकि जांच रिपोर्ट में चिदंबरम या फिर उस समय की यूपीए सरकार के किसी व्यक्ति का ज़िक्र नहीं है.

11 कार्यरत और सेवानिवृत अधिकारियों के बयानों पर आधारित 52 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि दस्तावेज 2009 में सितंबर के महीने में 18 से 28 तारीख के बीच ग़ायब हुए.

गुजरात हाई कोर्ट के सामने 29 सितंबर 2009 को दायर हलफ़नामे में कहा गया था कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि इशरत जहां चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रही थीं.

इससे पहले गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि 15 जून 2004 को अहमदाबाद के पास मुठभेड़ में इशरत जहां समेत मारे गए लोग इस चरमपंथी संगठन से जुड़े थे और उनका इरादा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का था.

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