क्यों नहीं ख़त्म हो रहा पोलियो का वायरस?

  • 18 जून 2016
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दक्षिणी राज्य तेलंगाना ने पोलियो का सक्रिय वायरस मिलने के बाद राज्य में हाई अलर्ट घोषित किया है.

यह वायरस राज्य की राजधानी हैदराबाद में एक नाले के पानी में मिला है.

भारत को 2014 में पोलियो से मुक्त घोषित किया गया था.

पारुल रात्रा ने कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों से बात करके समझना चाहा कि कैसे इसके ख़तरे से निपटा जा सकता है.

नाली में कहां से आया वायरस?

इलाहाबाद के क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर राजेश सिंह के मुताबिक़ नाले के पानी में दोबारा वायरस पाए जाने का कारण बहुत सारे बच्चों को पोलियो की दवा पिलाना है.

उनका कहना है, "जब पोलियो की दवा मुंह से पिलाई जाती है तब यह मल के रास्ते नाले में जाती है और वहां पोलियो के वायरस जमा हो जाते हैं."

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के डिप्टी चेयरमैन प्रदीप हल्दर ने कहा, "जब तक मुंह से दवाई दी जाती रहेगी तब तक लोग इसके शिकार बनते रहेंगे. यह कभी बंद नहीं हुआ था. यह पनपता रहा है और तब तक पनपता रहेगा जब तक हम मुंह से पोलियो की दवाई देना बंद नहीं करेंगे."

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देश के अंदर ही एक से दूसरे जगह पर पलायन और जल प्रदूषण भी इसकी वजहें हो सकती हैं.

ऐसे हालत से कैसे निपटते हैं अधिकारी?

डॉक्टर हल्दर ने बताया, "जब यह पता चला कि हैदराबाद में पोलियो का ख़तरा हो सकता है तो तुरंत दो हफ़्ते के भीतर एक सैंपल लिया गया और पोलियो साबित करने वाली यह रिपोर्ट सात जून को आई है. अगर इसके वातावरण में फैलने का कोई मामला सामने आता है तो सभी संभावित क्षेत्रों में इसकी स्कैनिंग और इस पर कार्रवाई ज़रूरी है."

स्कैनिंग तीन चरणों में पूरा किया जाता है. पहला टीकाकरण, दूसरा वायरस से प्रभावित बच्चों का परीक्षण और पोलियो सर्विलेंस (पोलियो निगरानी).

डॉक्टर हल्दर बताते हैं, "अगर ये तीन कसौटियां ठीक हैं तो हम पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि जोखिम कम होगा क्योंकि पोलियो की निगरानी करने का तरीका उच्च मापदंड वाला है. अगर 2000 में से एक बच्चा भी प्रभावित है तो पांच फ़ीसदी जोखिम बढ़ जाता है या अगर निगरानी के दौरान कोई बच्चा छूट जाता है तो जोखिम ज़्यादा बढ़ जाता है लेकिन हमें यकीन है कि यह ऐसा मामला नहीं है."

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डॉक्टर राजेश सिंह कहते हैं कि पांच किलोमीटर के दायरे में जितनी जल्दी संभव हो टीकाकरण करके वायरस फैलने की संभावना को ख़त्म किया जाए.

अधिकारियों की योजना है कि हैदराबाद में तीन लाख से ज़्यादा बच्चों का 28 जून से टीकाकरण किया जाएगा.

भारत में पोलियो बड़ा ख़तरा बन सकता है?

डॉक्टर राजेश सिंह के मुताबिक़ फिर से पोलियो होने की संभावना बहुत कम है.

उन्होंने बताया, "अगर बच्चे को पहले साल से ही समय से टीका दे दिया जाए है तो पोलियो की संभावना पूरी तरह से ख़त्म हो सकती है."

हालांकि डॉक्टर प्रदीप हल्दर का कहना है कि मुंह से पोलियो पिलाने के साथ जुड़ी समस्याओं का मुद्दा छोड़ भी दिया जाए तो कम से कम एक सौ से हज़ार लोगों में 'वाइल्ड' पोलियो वायरस का जोखिम होता है. यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है.

2011 में टीकाकरण बंद होने के बाद एक भी नया मामला वायरस का नहीं आया है.

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