जब बीजेपी ने एफडीआई का विरोध किया था

  • 20 जून 2016
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भारत सरकार ने रक्षा, विमानन और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफ़डीआई को मंजूरी दी है.

प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले के बाद #100%FDI ट्विटर पर ट्रेंड्स में शामिल है.

वरिष्ठ पत्रकार मिनहाज मर्चेंट (‏@minhazmerchant) ने ट्वीट किया, "मोदी सरकार का पहला बड़ा आर्थिक सुधार. विमानन, ई-कॉमर्स और डिफ़ेंस में 100 प्रतिशत एफ़डीआई, फ़ार्मा में 74 प्रतिशत."

वरिष्ठ पत्रकार माधवन नारायणन (@madversity) ने ट्वीट किया, "रघुराम राजन के जाने के डर के माहौल में विमानन और रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफ़डीआई का बड़ा फ़ैसला. बाज़ार को रिझाने के लिए एनडीए ने अच्छा दाव खेला."

निकुंज शाह (@niku1630) ने लिखा, "कांग्रेस जो 60 सालों में नहीं कर पाई, मोदी सरकार ने दो साल में कर दिया. बड़े सुधार लागू करते हुए सरकार ने 100 प्रतिशत विदेशी निवेश लागू किया."

विदेशी निवेश भारत में बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी जब विपक्ष में थी तो एफ़डीआई की प्रखर विरोधी थी.

मौजूदा केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का जुलाई 2013 में किया गया एक ट्वीट भी ख़ूब शेयर किया जा रहा है.

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इस ट्वीट में जावड़ेकर ने रक्षा क्षेत्र में एफ़डीआई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए कहा था, "टेलीकॉम और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश से सुरक्षा के लिए ख़तरे पैदा हो सकते हैं और इसके तहत नवीनतम तकनीक मिलने की गारंटी भी नहीं है."

वहीं जुलाई 2013 में ही किए गए एक ट्वीट में भाजपा महिला मोर्चा की नेता प्रीति गांधी ने लिखा था, "रक्षा और मीडिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाज़ार को बढ़ावा देने के लिए एफ़डीआई बढ़ाने से राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है."

डॉ राकेश पारिख (@drrakeshparikh) ने ट्वीट किया, "अब हमें विदेशी निवेश के मुद्दे पर सुषमा स्वराज और अन्य नेताओं के यूपीए शासनकाल के दौरान संसद में दिए गए बयानों को फिर से सुनना चाहिए."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यूपीए शासनकाल के दौरान एफ़डीआई का विरोध किया था.

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दिसंबर 2012 में किए गए एक ट्वीट में मोदी ने लिखा था, "कांग्रेस राष्ट्र को विदेशियों को सौंप रही है. ज़्यादातर पार्टियां एफ़डीआई का विरोध कर रही हैं लेकिन सीबीआई के डर की वजह से उन्होंने मतदान नहीं किया और कांग्रेस पिछले दरवाज़े से जीत गई."

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वहीं सितंबर 2012 में किए गए एक अन्य ट्वीट में मोदी ने कहा था, "असम और एफ़डीआई का मुद्दा बताता है कि हमारे प्रधानमंत्री ने हमारे लोकतंत्र की नई परिभाषा गढ़ दी है. विदेशियों की सरकार, विदेशियों के द्वारा, विदेशियों के लिए."

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