'जनसमूह में योग करना हमाम में नहाने जैसा'

प्रशांत अयंगर इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

अयंगर योग के प्रशिक्षक प्रशांत अयंगर का कहना है कि योग को लोकप्रिय बनाना ठीक है लेकिन उसके प्रचार का तरीका सही नहीं है.

प्रशांत अयंगर योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले बीकेएस अयंगर द्वारा स्थापित रमामणि अयंगर मेमोरियल योग इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं.

वे कहते हैं, ''योग को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार का प्रयास सही है लेकिन उसे जिस तरह प्रचारित किया जा रहा है, वो सही नहीं है. योग सीखने नहीं बल्कि आत्मसात करने की बात है. इसके लिए गुरुकुल जैसे व्यक्तिगत मार्गदर्शन की व्यवस्था चाहिए. जन समूह के बीच योग करना हमाम में नहाने जैसा है.''

इमेज कॉपीरइट Devidas Deshpande

दो साल पहले केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास करते नज़र आए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था.

इमेज कॉपीरइट Reuters

लेकिन इस तरह के प्रयासों पर प्रशांत अयंगर की राय अलग है. उनका मानना है, "बड़े पैमाने पर योग के कार्यक्रम करने से लोगों को केवल पता चलेगा कि योग जैसी कोई चीज है. लेकिन इससे योग उनके जीवन का हिस्सा नहीं बनेगा. सरकार योग सिखाने वाले शिक्षक तैयार करना चाहती है, लेकिन उससे भोंदू लोग ही बढ़ेंगे. आज भी योग के क्षेत्र में कई भोंदू हैं जिनके कारण लोग योग के बारे में नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं.''

इमेज कॉपीरइट Getty

वे कहते हैं, ''आज अनेक आश्रम और संस्थाएं योग के लिए काम कर रही हैं. उन्हें साथ लेकर इसे गुरुकुल व्यवस्था की तरह सिखाया जाना चाहिए. टीवी या पुस्तकों में देखकर योग करने से कोई फायदा नहीं होगा बल्कि लंबी अवधि में नुकसान ही होगा.''

प्रशांत अयंगर स्कूली बच्चों में योग के प्रसार को लेकर भी आगाह करते हैं.

इमेज कॉपीरइट THINKSTOCK

वे कहते हैं, ''हमारे विद्यालय साफ़-सुथरे नहीं होते. ऐसे में बच्चों को सीधे योग की क्रियाएं अथवा आसन सिखाने से उनके मन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. उनके मन में योग के प्रति तिरस्कार जागेगा जो शायद 20-25 वर्षों तक कायम रह सकता है.

इमेज कॉपीरइट EPA

अयंगर मानते हैं, ''बच्चे जब कुछ समझदार हो जाए तब हो सकता है उनमें फिर से योग के प्रति लगाव हो, लेकिन तब तक काफ़ी देर हो चुकी होगी. इसलिए योग के ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रम हमाम में नहाने जैसा है. उससे असली सफाई नहीं हो सकती. उसी तरह योग का वास्तविक उद्देश्य व्यक्तिगत तौर पर ही साध्य किया जा सकता है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार