नेत्रहीन आईएएस अफ़सर पर बनेगी फ़िल्म

  • 22 जून 2016
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आँखें नहीं रहने के बावजूद भी राजेश सिंह ने यूपीएससी की परीक्षा पास की और देश के पहले नेत्रहीन आईएएस बने लेकिन फिर भी हालात बहुत नहीं बदले.

साल 2007 में परीक्षा पास करने के बाद भी उनकी नियुक्ति लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद 2011 में हो पाई.

इन दिनों वे झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग में संयुक्त सचिव हैं. राजेश सिंह पटना ज़िले के धनरुआ के रहने वाले हैं. यह गाँव विशेष प्रकार के लड्डुओं के लिए प्रसिद्ध है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि बचपन में क्रिकेट खेलते हुए एक हादसे में उनकी आँखों की रोशनी चली गई. इसके बावजूद उन्होंने देहरादून मॉडल स्कूल, दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू से पढ़ाई की. फिर यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बने, लेकिन नेत्रहीन होने की वजह से सरकार ने उनकी नियुक्ति का विरोध किया.

राजेश सिंह के मुताबिक़, इसी दौरान उनकी मुलाक़ात तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की बेटी डॉ उपेंद्र सिंह से हुई. वे सेंट स्टीफंस कॉलेज मे पढ़ाती थीं और उन्होंने राजेश सिंह को प्रधानमंत्री से मिलवाया.

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इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट गए. उनके मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर और अभिजीत पटनायक के बेंच ने की. कोर्ट ने सरकार को राजेश सिंह की नियुक्ति करने का निर्देश दिया. साथ ही अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि आईएएस के लिए दृष्टि नहीं दृष्टिकोण की ज़रूरत होती है.

ज़िंदगी के लिए दृष्टि जरूरी है या दृष्टिकोण. झारखंड कैडर के आईएएस राजेश सिंह मानते हैं कि इसके लिए दृष्टिकोण ज़्यादा जरूरी है.

इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें असम में पोस्टिंग दी. भाषाई दिक्कतों के कारण उन्होंने ट्रांसफर का अनुरोध किया. छह महीने पहले उनका झारखंड में स्थाई कैडर ट्रांसफर किया गया है. अब वे अपनी नौकरी के साथ दिव्यांगों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाने में लगे हैं.

उनके जज़्बे को देखते हुए भारत सरकार ने उनपर एक डॉक्यूमेंटरी बनाने का फ़ैसला किया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फ़िल्म्स डिविज़न ने इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया है. इस फ़िल्म की शूटिंग इसी महीने की जानी है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और मुख्य सचिव राजबाला वर्मा भी दिव्यांगों को संदेश देती नज़र आएंगी.

राजेश सिंह ने बीबीसी को बताया कि फिल्म के डायरेक्टर ने इस संबंध में उनसे संपर्क किया है.

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बच्चों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे स्टूडेंट ऑक्सीजन मूवमेंट के संयोजक विनोद सिंह का मानना है कि राजेश सिंह आज की पीढ़ी के लिए रोल माडल हैं. इनकी कहानी हर बच्चे को बतानी चाहिए. उन्होंने वहाँ से अपना सफ़र शुरू किया, जहाँ लोग हार मान लेते हैं.

राजेश सिंह के संघर्ष में दीपक कुमार का बड़ा योगदान है. दीपक उनके सहायक हैं और कॉलेज के दिनों के दोस्त भी. दीपक ने बीबीसी को बताया कि राजेश सिंह की दिनचर्या आमलोगों की तरह है. वे वैसा हर काम कर सकते हैं, जिसकी किसी सामान्य इंसान से अपेक्षा की जाती है.

राजेश सिंह ने अपने प्रोबेशन के दौरान एक किताब लिखी, 'पुटिंग द आई इन आईएएस'. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पिछले फ़रवरी में इसका लोकार्पण किया था. इस किताब को राजेश सिंह के संघर्ष की कहानी भी माना जाता है.

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