'ओबामा के घर खड़ी गाड़ियां भी गिन सकेंगे मोदी'

  • 23 जून 2016
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को पीएसएलवी सी34 के ज़रिए एक साथ 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुँचाया.

पीएसएलवी सी 34 ने जिस तरह सफलतापूर्वक 20 सैटेलाइट को उसकी कक्षा में पहुंचाया, ये एक बड़ी उपलब्धि है. यह काफी पेचीदा काम था.

इसरो के चेयरमैन ने बताया था कि रॉकेट के कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट को जिस तरह से कक्षा में उतारा जाता है, वो एक पेचीदा तरकीब पर महारत हासिल करने की तरह है.

इस लांच में भारत ने कार्टोसेट 2 सीरीज़ के सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा है.

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इसकी मदद से आसमान से ज़मीन की बेहतरीन तस्वीरें ली जा सकती हैं.

यदि भारत के प्रधानमंत्री चाहें तो अपने कार्यालय में बैठे-बैठे बराक ओबामा के घर के बाहर कितनी गाड़ियां खड़ी हैं, वो गिनकर बता सकते हैं.

किस सैन्य और असैन्य हवाईअड्डे पर कितने हवाई जहाज खड़े हैं, इसका भी पता इस सैटेलाइट की मदद से लगाया जा सकता है.

ये आने वाले समय में भारत की सीमा सुरक्षा में मदद करेगा.

शहरी विकास और स्मार्ट सिटी के विकास की योजनाओं में भी यह सैटेलाइट मदद करेगा. पर्यावरण को होने वाले नुक़सान पर नज़र रखने में भी यह मददगार साबित होगा.

यह पूरी तरह से भारत में तैयार किया गया एक उम्दा सैटेलाइट है.

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बुधवार को जिस पीएसएलवी सी 34 से इन सैटेलाइट को अंतरिक्ष पहुंचाया गया, वह दो टन तक के सैटेलाइट ले जाने में सक्षम था.

इस साल भारत एक बड़ा रॉकेट जियो सैटेलाइट लांच व्हीकल मार्क 3 टेस्ट करेगा, जो कि चार टन तक के सैटेलाइट अंतरिक्ष में ले जाएगा.

भारत एक ऐसा अंतरिक्ष यान विकसित करने में भी जुटा है जो अंतरिक्ष से वापस श्रीहरिकोटा आ सके. उसका फिर से इस्तेमाल किया जा सके.

इसमें हालांकि अभी दस साल लग जाएंगे. इसरो का मानना है कि इससे लागत दस गुना तक कम हो जाएगी.

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अब तो गवर्नेंस में भी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है. इसरो की तस्वीरों से पता चलता है कि कहां पर कितने किलोमीटर सड़क तैयार हुई है या किसी ने सड़क बनाने के नाम पर झांसा तो नहीं दिया.

आने वाले समय में भारत का जीपीएस सिस्टम ट्रांस्पोर्टेशन के क्षेत्र में नई जान फूंक देगा.

(वरिष्ठ विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला से बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी की बातचीत पर आधारित)

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