ब्रिटेन के यूरोप छोड़ने का भारत पर ये असर

  • 24 जून 2016
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ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) के बाहर निकलने के फ़ैसले का दुनिया भर पर असर होगा, भारत भी इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगा.

भारत के वित्त मंत्री और रिज़र्व बैंक के गवर्नर जिस गंभीरता से इसके असर को कम करने की बात कह रहे हैं उससे समझ में आता है कि भारत के लिए इसके परिणाम कितने गहरे और दूरगामी हो सकते हैं.

आर्थिक असर

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शेयर मार्केट में आने वाली अस्थिरता से जो नुक़सान होगा वो तो होगा ही, भारत और ब्रिटेन दोनों बड़े व्यापारिक साझीदार हैं. ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति डाँवाडोल होने का मतलब होगा भारत पर सीधा असर.

भारत की सैकड़ों बड़ी और मझोली कंपनियाँ ब्रिटेन में सक्रिय हैं, उन पर आर्थिक अस्थिरता का जो असर पड़ेगा वह भारत को भी प्रभावित करेगा.

मिसाल के तौर पर टाटा समूह ब्रिटेन की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, टाटा समूह निश्चित तौर पर जनमत संग्रह के परिणाम को लेकर चिंतित है क्योंकि टाटा मोटर्स की कमाई का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ब्रिटेन से आता है.

आवाजाही पर असर

ऐसे भारतीयों की संख्या काफ़ी बड़ी है जिनके कारोबार और परिवार बेल्जियम, इटली, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे देशों में है लेकिन यूरोप में उनका मुख्य ठिकाना ब्रिटेन ही है.

ऐसी बहुत सारी भारतीय कंपनियाँ भी हैं जिनका यूरोपीय मुख्यालय ब्रिटेन में है जबकि कारोबार कई दूसरे यूरोपीय देशों में, ऐसे लोगों और कारोबारियों पर इस फ़ैसले का सीधा प्रभाव होगा.

जो भारतीय कंपनियाँ, ख़ास तौर पर आईटी कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को आसानी से ब्रिटेन और यूरोप के दूसरे देशों में कारोबारी ज़रूरत के हिसाब से भेजती रही हैं उन्हें दिक्क़तों का सामना करना होगा.

अब तक ब्रिटेन का पासपोर्ट यूरोपीय पासपोर्ट है और यूरोपीय पासपोर्ट धारक ईयू के किसी भी देश में रह सकते हैं या काम कर सकते हैं लेकिन ब्रिटेन के बाहर निकलने के बाद ऐसा नहीं रह जाएगा.

भारत के गोवा में रहने वाले हज़ारों लोगों के पास पुर्तगाली पासपोर्ट है जबकि पुड्डुचेरी के बहुत सारे लोगों के पास फ्रांसीसी पासपोर्ट है, इनमें से बहुत सारे लोग अपने पुर्तगाली और फ्रांसीसी पासपोर्ट के साथ ब्रिटेन में रह रहे हैं, ब्रिटेन के यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं रहने पर वे वहाँ नहीं रह पाएँगे.

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