'इस्लाम के नाम पर हमले शर्मनाक'

  • 27 जून 2016
महबूबा मुफ़्ती इमेज कॉपीरइट EPA

दिल्ली से छपने वाले अंग्रेज़ी अख़बारों में आज जो ख़बरे सुर्खियां बनी हैं वो हैं, भारत-प्रशासित कश्मीर में सीआरपीएफ़ के आठ जवानों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान की तरफ़ उंगली उठाई, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा चरमपंथी इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं, परमाणु आपूर्तीकर्ता समूह में भारत के लिए अब भी उम्मीद बाक़ी.

द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित किया है कि चरमपंथी हमले में मारे गए सीआरपीएफ़ के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि हमला करने वालों ने कश्मीर और इस्लाम को बदनाम किया है. विपक्षी पार्टी नेश्नल कांफ्रेंस ने महबूबा मुफ़्ती के बयान की आलोचना की है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि महबूबा मुफ़्ती ने उन्हें समझ नहीं आ रहा कि रमज़ान के महीने में इस तरह की शर्मनाक कार्रवाई इस्लाम के नाम पर कैसे की जा सकती है.

भारत प्रशासित कश्मीर के पंपोर में पाकिस्तान आधारित लश्करे तैयबा के चरमपंथियों के हमले में सीआरपीएफ़ के आठ जवानों की मौत हो गई थी.

वहीं अख़बार लिखता है कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत पहली गोली नहीं चलाएगा लेकिन अगर पाकिस्तान ने गोली चलाई तो फिर गोलियों का हिसाब नहीं रखा जाएगा. राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर भारत को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है.

'द हिंदू' के पहले पन्ने पर प्रमुखता से प्रकाशित एक ख़बर के मुताबिक़ एक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि 2015-16 में 80 फ़ीसदी भारतीय कंपनियां भ्रष्टाचार से जुड़े फर्ज़ीवाड़े का शिकार हुई हैं. 2013-14 में ये आंकड़ा 69 प्रतिशत बताया गया था, अख़बार ने लिखा है "भ्रष्टाचार से जुड़ी धोखाधड़ी में भारत टॉप तीन में"

एक कंस्लटेंसी कंपनी क्रॉल की ग्लोबल फ्रॉड रिपोर्ट 2015-16 छह महाद्वीपों में किए गए सर्वे में फ़र्ज़ीवाड़े का शिकार होने की कथित प्रबलता में भारत तीसरे स्थान पर है. इस सूची में कोलंबिया 83 फ़ीसदी के साथ दूसरे स्थान और सब-सहारन अफ़्रीका 84 फ़ीसदी के साथ सबसे ऊपर है. ये सर्वे इकॉनोमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की मदद से किया गया है.

इमेज कॉपीरइट Getty

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने लिखा है की 30 लाख लोगों के दस्तख़त के साथ लंदन को ब्रिटेन से अलग कर यूरोपीय संघ से जोड़ने की मांग ने ज़ोर पकड़ा है. ये संख्या हाउस ऑफ़ कॉमन्स में चर्चा के लिए ज़रूरी एक लाख दस्तख़तों से कहीं ज़्यादा है.

इमेज कॉपीरइट bbc

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सुब्रमण्यम स्वामी का निशाना बन रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली चाहते हैं कि पार्टी स्वामी के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाए. हाल ही में मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास पर सुब्रमण्यम स्वामी और अरुण जेटली में नोंकझोंक हुई थी.

अख़बार के मुताबिक़ पार्टी का एक धड़ा मानता है कि स्वामी के ख़िलाफ़ पार्टी को कोई कार्रवाई करनी चाहिए. अरुण जेटली चीन की राजधानी बीजिंग से लौटने के बाद इस पर तेज़ी से काम करेंगे.

इमेज कॉपीरइट EPA

जनसत्ता अख़बार ने लिखा है, '' जहां चीन को नहीं मिली एंट्री, वहां पहुंचेगा भारत, एनएसजी जाने का यहां से खुल सकता है रास्ता.'' भारत आज मिसाइल टेक्नॉलोजी कंट्रोल रजीम (एमटीसीआर) का सदस्य बन जाएगा.

अख़बार के मुताबिक एमटीसीआर में भारत की एंट्री को ऐसे मौक़े के तौर पर देखा जा रहा है जिससे भारत चीन को ‘ब्लैकमेल’ करके एनएसजी में सदस्यता ले सकता है. चीन इस समूह का सदस्य नहीं है.

वहीं द पायनियर ने लिखा है कि एनएसजी में भारत की एंट्री के लिए दिसंबर में बातचीत हो सकती है. अख़बार ने लिखा है कि चीन ने भले ही एनएसजी में भारत की सदस्यता की राहत में रोड़े अटकाए लेकिन भारत के लिए ये कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती.

इमेज कॉपीरइट AFP

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने पहले पन्ने पर लिखा है कि रियो जाने वाले भारतीय ओलंपिक दल में सौ खिलाड़ियों को जगह मिली, ऐसा पहली बार हुआ है.

इससे पहले 2012 में लंदन ओलंपिक के लिए भारत के सबसे बड़े दल में 83 खिलाड़ी शामिल थे. धावक द्युति चांद के चुनाव के बाद ओलंपिक के लिए जिन भारतीय खिलाड़ियों ने क्वालिफ़ाई किया उनमें धावक स्रबनी नंदा, मोहम्मद अनस और तिरंदाज़ अतानू दास शामिल हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार