सरकार में ऐसे लोग हैं जो रोज़ गुमराह कर रहे हैं: यशवंत

  • 26 जून 2016
एनएसजी बैठक इमेज कॉपीरइट AP

पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के लिए मोदी सरकार के प्रयासों की कड़ी आलोचना की है. विपक्षी कांग्रेस ने भी विफल रहे इन प्रयासों पर सरकार की कूटनीति की आलोचना की है.

सिन्हा के मुताबिक भारत को इस ग्रुप का हिस्सा बनने और इसकी सदस्यता के लिए अर्ज़ी देने की ज़रूरत ही नहीं थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, विदेश मंत्री रहे सिन्हा ने कहा, "भारत को एनएसजी की सदस्यता के लिए इतनी उत्सुकता दिखाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है. मैं पूरा ज़ोर देकर कहना चाहता हूं कि भारत को एनएसजी की सदस्यता नहीं लेनी चाहिए. हमें उनके पास आवेदक के तौर पर नहीं जाना चाहिए. जो कुछ हमें मिलना था, हमें पहले ही मिल चुका है."

उनका कहना था, "मुझे नहीं पता कि जो लोग सरकार में बैठे हैं वो इसे समझते हैं या नहीं. लेकिन मुझे पता है कि सरकार में ऐसे लोग बैठे हैं जो उसे रोज़ाना गुमराह कर रहे हैं."

उनका बयान ऐसे वक्त पर आया है जब भारत ने, 48 देशों के एनएसजी समूह की सदस्यता पाने के लिए अपना दावा पेश किया है.

लेकिन भारत के दावे पर चीन समेत कई देशों का अलग मत था और भारत के दावे का विरोध हुआ. विरोध करने वाले कुछ देश नहीं चाहते कि जिस देश ने प्रमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, वो एनएसजी का सदस्य बने.

चीन प्रमुख रूप से इस मुद्दे पर भारत के एनएसजी सदस्यता का विरोध कर रहा है.

इमेज कॉपीरइट Anand Sharma Twitter

विपक्षी दल कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने भी एनएसजी की सदस्यता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की आलोचना की है.

अपने ट्वीट में आनंद शर्मा ने लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये समझने की ज़रूरत है कि कूटनीति में गहराई और गंभीरता की आवश्यकता होती है सार्वजनिक स्तर पर तमाशे की नहीं."

इमेज कॉपीरइट TV IMAGE

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि परमाणु अप्रसार संघि पर भारत की साख के बारे में सबको पता है.

उन्होंने कहा, "मैं हार शब्द का इस्तेमाल नहीं करूंगा. लेकिन हां, हम जैस परिणाम चाहते थे वैसा नहीं हुआ."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार