चीन का असर दक्षिण भारतीय डोसे तक !

  • 27 जून 2016
डोसा इमेज कॉपीरइट thinkstock

मुंबई से करीब 75 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में एक्सप्रेस-वे से सटा हुआ एक ढाबा है जिसमें आपको मैक्सिकन डोसा, रूसी सलाद डोसा और चाइनीज डोसा मिलता है.

मध्यम वर्गीय परिवारों से खचाखच भरा रहने वाला यह ढाबा उस भारत की तस्वीर पेश करता है जो गाड़ियों के अपने नए शौक़ के साथ हमेशा नई जगह और नए अनुभवों की तलाश में एक्सप्रेसवे पर सफर करता है और खाने के लिए ऐसी जगहों पर रुकता है.

चावल से बना डोसा एक ऐसी डिश है जो आम तौर पर एक तरफ से सफेद और दूसरी तरफ से भूरा खस्ता होता है.

डोसे की कहानी ख़ुद में एक सफर की तरह है.

इसकी यात्रा दक्षिण भारत से शुरू होती है और वक्त के साथ पूरे देश में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती है.

हम यहां जितने तरह की डोसों की बात कर सकते हैं, भारत में उससे कहीं ज्यादा तरह के डोसे बनाए जाते हैं.

इनमें से कुछ डोसे नए मध्यवर्गीय भारतीय परिवारों की खास पसंद है.

कुछ भी हो जाए, भारतवासी खाना नहीं छोड़ेंगे !

इन कई प्रकार के डोसों में जो मध्यवर्गीय परिवारों की पसंद बन चुके हैं उनमें चीन का भी खासा प्रभाव दिखता है. मसलन शेज़वान डोसा.

पूरे भारत में शेज़वान डोसा की मौजदूगी से पता चलता है कि भारतीय खाद्य संस्कृति में चीन का कितना प्रभाव है. हालांकि चीन के लोग इस शेज़वान को पहचानने से इंकार ही कर देंगे. वैसे शेज़वान चीन के सिचुआन प्रांत से आया है जहां मिर्च और काली मिर्च का खाने में अधिक उपयोग होता है.

जैसा कि हम जानते ही हैं भारतीय खाने-पीने की उन चीजों को हाथोहाथ लेते हैं जिसमें मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है. नए स्वादों को लेकर भारतीयों की खोज हमेशा जारी रहती है.

इस तलाश ने भारतीयों को नब्बे के दशक में हुए आर्थिक सुधारों के बाद गहरे नारंगी रंग के चीनी सॉस यानी शेज़वान सॉस तक पहुंचा दिया.

ये सॉस धड़ल्ले से सड़क किनारे मिलने वाले फास्ट फूड के अलावा रेस्तरां और घर की रसोई में भी पहुंच गया.

4,000 साल पुराना खट्टा-मीठा बैंगन

कोई नहीं जानता कि डोसा और शेज़वान सॉस एक साथ कैसे मिले लेकिन इन दोनों के एक साथ इस्तेमाल करने से शेज़वान बटर डोसा, शेज़वान मसाला डोसा और शेज़वान नूडल डोसा जैसे कई नए पकवान सामने आए.

इमेज कॉपीरइट thinkstock

इसमें आम डोसे में भरे जाने वाले मसाले के साथ बटर, मसालेदार सब्जी और नूडल के साथ-साथ सॉस भी डाल दिया जाता है.

खानों की विशेषज्ञ तरला दलाल इस डोसे को बनाने की विधि के बारे में अपनी वेबसाइट पर लिखती हैं, "आम तौर पर भरे जाने वाले आलू की जगह मसाला डोसा में शेज़वान चॉप्सी भर दें. नूडल्स और सब्जियों के होने के कारण यह एक भरपूर मात्रा वाला डिश होता है. यह ना सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि पेट भरने वाला भी होता है."

डोसे में इस्तेमाल होने वाली खाने-पीने की चीज़ें

काली बीन के साथ-साथ सब्जियां

भुना हुआ पनीर

शेज़वान सॉस में लपेटा हुआ पनीर

चाउ चु आलू

आलू-जियांग मिर्च

लहसून और मिर्च का चाइनीज सॉस

इमेज कॉपीरइट thinkstock

आप जब पूरे भारत का दौरा करेंगे तो आपको पश्चिम में कोन्कण तट के किनारे नारियल वाला कोन्कण-चाइनीज, दक्षिण-पूर्व में भरपूर मिर्च-मसाला वाला तेलुगू-चाइनीज और पनीर से भरा हुआ चाइनीज-लुधियानवी भोजन मिलेगा.

खानों पर कॉलम लिखने वाले वीर सांघवी का कहना है कि चीन का कोई भी आदमी इनमें से किसी भी पकवान को चीनी पकवान के रूप में नहीं पहचान पाएगा.

समोसे की भारत पहुंचने की दास्तां

बाहर से आए व्यंजन और भारतीय व्यंजनों के मिश्रण से बनने वाले खानों की सूची में चीनी पकवान शायद पहले नंबर पर हों.

लेकिन कोई भी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था की चाहत रखने वाला देश इस तरह के प्रयोगों से बच नहीं सकता.

एक ऐसा देश जहां मिर्च के बिना खाने के बारे में सोचा नहीं जा सकता वहां किसी को यह यकीन दिलाना मुश्किल है कि भारतीय लोग मिर्च के बारे में पुर्तगालियों के आने से पहले नहीं जानते थे.

पकवानों में तीखे मसालों के इस्तेमाल को तरजीह दी जाती है लेकिन जरूरी नहीं है कि ऐसा हो ही.

इसलिए भारतीय थाई, मैक्सिकन, इंडोनेशियाई, मलय और इतालवी खानों को खूब पसंद कर रहे हैं. ये ऐसे खाने हैं जिन्हें कभी भारत में बाहरी खाने के तौर पर देखा जाता था.

बहुराष्ट्रीय फूड चेन मसालों के कम इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं.

इसलिए भारत में मैकडोनाल्ड का सबसे लोकप्रिय आइटम मैक आलू टिक्की बर्गर है. पीट्ज़ा हट धनिया, इलायची और मेथी वाला 'करी क्रस्ट' बेचता है और डोमिनोज़ 'सदर्न चिली चिकन' डाला हुआ पीट्ज़ा बेचता है.

विदेशी खानों के साथ देशी खानों के मेल ने टॉर्टिया (मैक्सिकन तरीके की रोटी) में लिपटा हुआ चिकन टिक्का, समोसा, भरा हुआ पिज़्ज़ा और बाओ में भरा हुआ पंजाबी बटर चिकन जैसे नए पकवानों को इन दिनों जन्म दिया है. बाओ एक खास तरह की चीनी रोटी होती है.

खाने-पीने के चीजों में ये प्रयोग अमीर और गरीब के बीच के फर्क के हिसाब से भी दिखता है.

अमीर जहां बाओ और टॉर्टिया में लिपटा हुआ चिकन टिक्का खाते हैं तो मध्यम वर्ग की पहुंच अभी भी शेज़वान डोसे तक ही है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार