ड्रीम जॉब: इन्हें कॉफ़ी पीने के मिलते हैं पैसे!

  • 27 जून 2016

आपको यह सुनकर कैसा लगेगा कि किसी को कॉफ़ी चखने के लिए नौकरी पर रखा गया है.

लेकिन यह कहानी ऐसी ही एक महिला की है जिन्हें कॉफ़ी चखकर उसकी गुणवत्ता जांचने के लिए पैसे मिलते हैं.

सुनलिनी मेनन भारत की पहली ऐसी महिला हैं जो इंडियन कॉफ़ी बोर्ड में कॉफ़ी चखने की नौकरी करती थीं.

इंडियन कॉफ़ी बोर्ड में अपनी नौकरी के दौरान उन्हें लैंगिक भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ाई भी लड़नी पड़ी थी.

चालीस सालों के बाद भी उनकी जीभ के टेस्ट बड शानदार तरीके से काम करते हैं.

इमेज कॉपीरइट KASHIF MASOOD

आज वे विदेशी बाज़ारों के लिए 'प्रीमियम कॉफ़ी' बनाती हैं. वे इसे 'स्पेशल कॉफ़ी' के तौर पर मानने से इंकार करती हैं.

सुनलिनी मेनन ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मैं प्रीमियम शब्द के इस्तेमाल में ज़्यादा सुरक्षित महसूस करती हूं. अगर मैं स्पेशल कहती हूं तो इस बात का जोखिम हो सकता है कि उसमें कुछ खास न हो. लेकिन जब मैं प्रीमियम कहती हूं तो इसका मतलब है कि यह थोड़ा हटकर है."

अब वे कॉफ़ी लैब लिमिटेड में मुख्य कार्यकारी के तौर पर काम करती हैं. कॉफ़ीलैब लिमिटेड की स्थापना 1996 में हुई थी.

सुनलिनी कॉफ़ी बोर्ड से अपनी इच्छा से रिटायरमेंट लेने के बाद कॉफ़ी लैब लिमिटेड से जुड़ गई थीं.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

और अब भी वे किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दे रही हैं जिससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है.

कॉफ़ी का उत्पादन करने वालों को उनकी सलाह के बाद तीन गुना ज्यादा क़ीमत मिलती है.

वो कहती हैं, "हां उन्हें ब्रांडेड कॉफ़ी की ज्यादा क़ीमत मिलती है. मसलन अगर बाज़ार में एक पाउंड कॉफ़ी के लिए दो अमरीकी डॉलर मिल रहे हैं तो बहुत संभव हैं उन्हें इसके छह या पांच डॉलर मिलेंगे."

कॉफ़ी बोर्ड में सहायक टेस्टर (कॉफ़ी चखकर बताने की नौकरी) के लिए उन्हें छोड़कर सभी पुरुष ही उनके साथ प्रतियोगिता में शामिल थे.

इमेज कॉपीरइट KASHIF MASOOD

उन्होंने नौकरी के दौरान न सिर्फ लैंगिक भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी बल्कि इस क्षेत्र में जानकारी की कमी से भी उन्हें जूझना पड़ा.

जीवन के प्रति "मुझे सीखना चाहिए, मुझे सबसे आगे होना चाहिए" जैसे उनके दृष्टिकोण की वजह से उन्हें बोर्ड की ओर से विदेश जाकर कॉफ़ी को परखने की बारीकियों को सीखने का भी मौका मिला.

इस प्रशिक्षण ने स्वाद के आधार पर कॉफ़ी परखने का विभाग बनाने में मदद की.

इसके बाद कॉफ़ी की मात्रा और गुणवत्ता का मूल्यांकन शुरू हो गया और इसी आधार पर किसानों को मिलने वाले दाम भी तय होने लगे.

इससे गुस्साए किसानों को सुनलिनी के इस तरीके को समझने में बहुत समय लग गया.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

सालों के अनुभव के बाद वो उस मुकाम पर पहुंची है कि कॉफ़ी की पहली चुस्की उन्हें बहुत सारी जानकारियां दे देती हैं.

उनका कहना है, "कॉफ़ी की खुशबू मेरे लिए पहली सबसे महत्वपूर्ण जानकारी है. अच्छा स्वाद पकड़ने वाले में सूंघने की तीक्ष्ण योग्यता का होनी जरूरी है."

वो बताती हैं, "सबसे पहले तो मुझे कॉफ़ी की खुशबू की वजह से ही कॉफ़ी के बीज के बारे में पता चल जाता है लेकिन उसे पक्का करने के लिए मुझे उसे चखना पड़ता है."

सुनलिनी मानती हैं कि 'यह एक मुश्किल काम है लेकिन बहुत दिलचस्प है. और खासकर जब आप सही नतीजे पर पहुंचते हैं तो यह और भी दिलचस्प हो जाता है.'

इससे उन्हें वाकई में बड़ी खुशी मिलती है जब कोई किसान उनके पास आकर कहता है, 'आप कैसे जान गईं कि मैंने कॉफ़ी को सूखी जगह पर ड्रेक नहीं किया.'

इस पेशे में बने रहने के लिए क्या-क्या करना होता है?

वो कहती हैं, "आपको अच्छी सेहत बनाए रखनी होती है. आपको अक्सर जुकाम नहीं होना चाहिए. यह काम एलर्जी के मरीजों के लिए नहीं है. आपको अच्छी नींद लेने की जरूरत है."

वो आगे कहती हैं, "शराब पीने से आपके तालू खुरदुरे हो जाएंगे इसलिए शराब से परहेज करना होता है. तालू को सिगरेट से भी बचाना पड़ता है. तंबाकू खाना बिल्कुल मना है. गर्म मसालेदार खाना नहीं खा सकती हूँ और मैं एक बार फिर से कह रही हूं कि मुझे पूरे अनुशासन के साथ सोने के समय का ख्याल रखना पड़ता है."

इस अनुशासन की वजह से ही कुछ महीने पहले उन्हें अमरीका में हुए टेस्ट में 110 में से 106 अंक मिले थे और उन्हें Q ग्रेड हासिल हुआ था.

इस क्षेत्र में आने वाले नए लोगों के लिए उनका संदेश बहुत साफ़ है, "अगर आप जल्दी पैसा कमाने की सोच रहे हैं तो यह पेशा आपके लिए नहीं है. इसमें आपकी सलाह मानने में लोगों को कई साल लग जाते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार