ये जिगर गया एक शहर से दूसरे नगर

  • 29 जून 2016
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महाराष्ट्र में प्रशासन और पुलिस की पहल से एक मरीज़ को जीवनदान मिल गया.

नाशिक से पुणे के बीच प्रशासन और पुलिस ने एक ग्रीन कॉरिडॉर बनाया ताकि 50 साल के मरीज़ को लगाने के लिए लीवर को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके.

इस कॉरि़डॉर के ज़रिए छह घंटे की दूरी साढ़े तीन घंटे में तय की गई.

इस मरीज़ को नाशिक में भर्ती सुभाष भानुशाली का लीवर लगाया गया, जिन्हें डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था. उनके परिजनों ने उनके अंगों का दान करने का निर्णय लिया.

इस फ़ैसले के बारे में अस्पतालों के बाद प्रादेशिक प्रत्यारोपण समिति को सूचित किया गया.

बीबीसी को जानकारी देते हुए इस समिति की समन्वयक आरती गोखले ने बताया,''सोमवार की सुबह ग्रीन कॉरिडॉर बनाना तय किया गया और पुलिस को ये जानकारी दी गई.''

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नाशिक-पुणे महामार्ग पर सभी पुलिस थानों, महामार्ग पुलिस को तैयार रहने को कहा गया और दोपहर करीब साढ़े तीन बजे नाशिक एम्ब्युलेन्स ग्रीन कॉरि़डॉर पर रवाना हुई.

एम्ब्युलेन्स समय पर पहुंच सके इसके लिए तमाम तरह के इंतज़ाम किए गए. शहर के सभी सिग्नल, चौराहों पर यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया.

पुणे के सहयाद्री अस्पताल में शाम साढ़े सात बजे एक मरीज़ का लिवर प्रत्यारोपण हुआ.

अस्पताल के यकृत प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. बिपीन विभुते ने बताया कि जिनका लिवर प्रत्यारोपित किया गया वह मरीज़ ५० वर्षीय पुरुष है. इस व्यक्ति को लिवर सिरॉसिस था.

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