औक़ात से ज़्यादा ख़र्च कर रहीं भारतीय कंपनियां

  • 29 जून 2016
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हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के पहले पन्ने पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध कंपनियों में हर तीन में से एक कंपनी पर उनकी कीमत से ज़्यादा कर्ज़ है.

ये भी कहा गया है कि कई कंपनियों के ऋण उनकी मार्केट कैप से 31 गुना ज़्यादा है.

अख़बार लिखता है कि जो तस्वीर दिख रही हैं उसके मुताबिक ऐसा लगता है कि भारतीय कंपनियां अपनी औक़ात से ज़्यादा ख़र्च कर रही हैं और ये कंपनियां अगर अपना एक-एक शेयर भी बेच दे तो भी अपना ऋण नहीं चुका पाएंगी.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि एनआईए से क्लीन चिट मिलने के बाद विशेष अदालत ने साधवी प्रज्ञा की ज़मानत याचिका रद्द की.

अख़बार लिखता है कि एनआईए को झटका देते हुए मालेगांव में 2008 में हुए धमाकों के मामले में अदालत ने साध्वी प्रज्ञा को ज़मानत देने से इनकार कर दिया है. एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दी थी लेकिन अदालत ने कहा है कि उनके खिलाफ़ प्रथम दृष्टया मामला बनता है.

इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि अदालत ने मालेगांव धमाकों में साध्वी प्रज्ञा की भूमिका की ठीक से जांच नहीं करने के लिए एनआईए को लताड़ा और ज़मानत देने से इंकार किया.

मालेगांव में सितंबर 2008 में धमाके हुए थे और साध्वी प्रज्ञा को अक्टूबर 2008 गिरफ़्तार किया गया था.

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इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने पर प्रकाशिक एक ख़बर में आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के माता-पिता का पक्ष दिया गया है.

उनकी मां मैथिली ने कहा है कि सवाल करने हैं तो उनकी नीतियों और काम पर किए जाने चाहिए उनकी देशभक्ति पर क्यों.

वहीं उनके पिता आर गोविंद राजन जो कि पूर्व सरकारी अधिकारी हैं, ने कहा है कि अगर सरकार रघुराम राजन पर हो रहे प्रहारों के मामले में पहले दख़ल देती तो शायद वो अपने पद पर बने रह सकते थे. रघुराम राजन पर सुब्रमण्यम स्वामी के बयानों को प्रधानमंत्री मोदी ख़ारिज कर चुके हैं.

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द हिंदू अख़बार तेलंगाना की अदालतों में कामकाज प्रभावित होने के बावजूद हैदारबाद हाईकोर्ट ने नौ और जजों को निलंबित किया जिन्होंने न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की अस्थाई सूची के विरोध में प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.

ये मामला निचली अदालत के जजों के आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के बीच जजों के बंटवारे की प्रक्रिया से नाख़ुश जजों से जुड़ा है. जजों का कहना है कि आंध्रप्रदेश से तेलंगाना भेजे जाने पर उनके प्रमोशन पर असर पड़ेगा.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के मुताबिक सड़क पर गाड़ियों में बेवजह हॉर्न बजाने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.

केंद्र सरकार ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए गाड़ी के मालिकों, कार डीलरों और हॉर्न बनाने वालों पर भारी जुर्माना लगाने की योजना बना रही है.

पहली बार बेजह हॉर्न बजाने के लिए पांच सौ रुपए, उसके बाद एक हज़ार रुपए और मल्टी टोन्ड और हवा वाले हॉर्न बनाने वाली कंपनियों पर पांच हज़ार रुपए का जुर्माना लगाने पर विचार किया जा रहा है.

ऐसे हॉर्न फिट करने वाले डीलरों पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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