नागपुर पुलिस की ट्विटर पर नई मुहिम

  • 5 जुलाई 2016
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Image caption नागपुर पुलिस के डीसीपी शैलेश बलकवड़े.

नागपुर में ट्विटर पर टैग करके आप पुलिस को अपनी समस्या के बारे में बता सकते हैं.

नागपुर में पुलिस के पांच जोन हैं. इनमें से जोन नंबर दो के सभी छह पुलिस स्टेशन पिछले गुरुवार को एक के बाद एक ट्विटर पर मौजूद नज़र आए.

इस जोन के इंचार्ज डीसीपी शैलेश बलकवड़े ने अपने ट्विटर हैंडल से पुलिस स्टेशनों के ट्विटर पर एक्टिव होने की जानकारी भी दी.

पुलिस के ट्विटर पर एक्टिव होने के मकसद के बारे में आईपीएस शैलेश बलकवड़े कहते हैं कि लोग ट्विटर पर अपने करीब के थाने को अपने आस-पास की घटना और कुछ होने की आशंका के बारे में बता सकते हैं.

पुलिस की नौकरी वैसे भी भाग-दौड़ की होती है. ऐसे में ट्विटर पर मोर्चा संभालने के लिए किसी भी थाने के पुलिसकर्मी को तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं.

शैलेश बलकवड़े के मुताबिक हर थाने के दो-दो पुलिस कर्मियों को खास तौर से तीन-तीन दिनों की ट्रेनिंग दी गई ताकि हर थाना 24 घंटे ट्विटर पर भी अलर्ट रह सकें.

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अब इस बारे में लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है. मुंबई और नागपुर में पुलिस कमिश्नर दफ्तर के अपने ट्विटर हैंडल हैं.

इन अनुभवों से पता चला है कि लोगों का पुलिस के प्रति नजरिया बेहतर बनाने और पुलिसकर्मियों को प्रेरित करने में ट्विटर ने अहम भूमिका निभाई है.

पुलिस थानों से जुड़े हुए कई व्हाट्स एप ग्रुप भी बने हुए हैं. ये व्हाट्स ग्रुप वरिष्ठ नागरिकों, पुलिस को सहायता करने वाले पुलिस मित्रों और महिलाओं के हैं.

आईपीएस शैलेश बलकवड़े बताते हैं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नागपुर से हैं और हर बैठक में वो सोशल मीडिया के जरिए जनता से बेहतर संपर्क कायम करने की बात करते हैं.

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इसलिए पुलिस कमिश्नर एसपी यादव की देखरेख में इसकी शुरुआत की गई.

पुलिस के इस कदम से लगता है कि समाज को ही पुलिस का एक्सटेंशन बनाने की कोशिशें हो रही हैं.

किसी अनहोनी की जानकारी देनी हो या किसी संदेहास्पद चीज के बारे में सूचना देनी हो, ऐसे में नज़दीकी पुलिस थाने से तत्काल संपर्क करना जरूरी होता है.

लेकिन वहां तक दौड़ लगाने या कॉल करने के बजाये अब उम्मीद की जा सकती है कि स्मार्टफ़ोन से ट्विटर पर जाना ही इसके लिए काफी होगा.

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