रायपुर: मंदिर को तोड़ने की कार्रवाई बंद

  • 3 जुलाई 2016
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीन पर बनाए गए मंदिर को तोड़ने की सरकार की कार्रवाई को रविवार तड़के शुरू करने के बाद, बीच में ही छोड़ दिया है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने एक ट्रस्ट बना कर सरकारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके उस पर मंदिर समेत कई निर्माण किए थे.

रविवार को सुबह सुरक्षा बल की भारी मौजूदगी में महादेवघाट मंदिर को तोड़ने का काम शुरू हुआ था.

रायपुर के आईजी जीपी सिंह ने बीबीसी को बताया, "मंदिर से जुड़ा हुआ व्यावसायिक परिसर तोड़ा जा चुका है. लेकिन भारी जनविरोध के कारण फिलहाल मंदिर को तोड़ने की कार्रवाई स्थगित कर दी गई है."

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असल में उच्चतम न्यायालय ने 2006 में दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों को सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर बनाये गए पूजास्थलों को हटाए जाने संबंधी मामले में हलफ़नामा देने के निर्देश दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसी साल 10 मई को रायपुर के इस मंदिर और उसके व्यावसायिक परिसर को तोड़ने के आदेश दिए थे.

लेकिन राज्य की भाजपा सरकार में शामिल मंत्री-विधायक और कई हिंदू संगठन इस मंदिर को बचाने के लिये धरना-प्रदर्शन कर रहे थे. यहां तक कि विपक्षी दल कांग्रेस ने भी मंदिर को बचाने की बात कही थी.

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राजधानी में इस मंदिर को तोड़े जाने के खिलाफ पिछले दो महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन हो रहे थे.

विवादास्पद मंदिर को तोड़ेने के लिए सरकारी कार्रवाई की खबर आने के बाद शनिवार शाम से ही रायपुर के कुछ इलाक़ों में तनाव का माहौल बना हुआ था.

शिव सेना से जुड़े लोग रात में ही मंदिर परिसर पहुंच गये थे.

विरोध प्रदर्शन को देखते हुए, मंदिर से जुड़े व्यावासायिक परिसर के कुछ हिस्सों को गिराने के बाद कार्रवाई रोक दी गई.

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छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल पर आरोप लगने के बाद रायपुर के कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने मामले की जांच कर 2014 में सरकार को रिपोर्ट दी थी. इसके बाद कलेक्टर ने पूरी संपत्ति ज़ब्त करने के निर्देश दिए थे.

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लेकिन जब इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो ‘हमर संगवारी’ नाम की संस्था ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर और व्यावसायिक परिसर को तोड़ने के आदेश दिए.

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