क्यों बढ़ रहा है पंजाब में 'आप' का आत्मविश्वास?

  • 4 जुलाई 2016
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आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इन दिनों दिल्ली से अधिक पंजाब में समय बिताने में मज़ा आता होगा.

वो दिल्ली में आए दिन किसी न किसी विवाद में घिरे रहते हैं. लेकिन पंजाब में उनका ज़बरदस्त स्वागत होता है. लोग उनकी बात सुनते हैं.

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में आप ने ख़ुद को कांग्रेस और सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा गठबंधन के विकल्प की तरह पेश किया है. राज्य के लोग इसे स्वीकार करते नज़र आ रहे हैं.

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पंजाब में रविवार को अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव में राज्य की 117 में से 100 सीटें जीतने की उम्मीद जताई है.

रविवार को उन्होंने युवाओं के लिए एक महत्त्वाकांक्षी, वादों से भरा चुनाव घोषणापत्र जारी किया.

पढ़ें- पंजाब के युवाओं से 'आप' ने किए कई वादे

इस घोषणा पत्र और चुनाव में जीत के केजरीवाल के दावों पर नज़र डालें तो पंजाब में पार्टी का आत्मविश्वास झलकता है.

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केजरीवाल के चुनावी दावों को उनके विरोधी भी हल्के में लेने की ग़लती नहीं करेंगे. पिछले साल फरवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके सहयोगी भी आप को 45 सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं थे.

केजरीवाल ने अकेले 60 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया था. उनकी बात सच निकली और पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिलीं.

पंजाब के मौजूदा दौरे से पहले भी वो कह चुके हैं कि पंजाब में दिल्ली का नतीजा दोहराया जाएगा.

उनके आत्मविश्वास की झलक पंजाब के किसानों में, युवाओं और पिछड़े वर्गों में साफ दिखाई देती है. केजरीवाल अपनी आदत के विपरीत पब्लिसिटी और शोरशराबे से दूर रहे हैं और 'आप' ने पंजाब में ज़मीनी स्तर पर संगठन को मज़बूत करने और लोगों से संपर्क साधने का ठोस काम किया है.

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इस साल, इस दौरे से पहले वो पांच बार पंजाब का दौरा कर चुके हैं.

पिछले साल गुरु ग्रंथ साहिब के कथित अपमान के बाद हुए हुए हंगामे के दौरान मैं पंजाब के एक गांव में गया था.

मैं उस परिवार से मिलने गया था जिसका एक नौजवान प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से मारा गया था. उस युवक के घर अरविंद केजरीवाल मौजूद थे. मीडया को भनक तक नहीं लगी.

हाल में मैं पंजाब दो बार गया हूँ. वहां के लोगों का झुकाव फ़िलहाल तो आम आदमी पार्टी की तरफ साफ़ महसूस किया जा सकता है.

पंजाब में पार्टी के संयोजक सच्चा सिंह छोटेपुर ने बीबीसी को बताया, "राज्य में पार्टी के आत्मविश्वास के दो मुख्य कारण हैं- पहला यह कि दिल्ली में पार्टी की सरकार की कामयाबियों ने पंजाब के लोगों पर अच्छा असर छोड़ा है. दूसरा कारण है अकाली दल-बीजेपी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा."

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आप ने अपने ताज़ा घोषणापत्र में दोआब इलाक़े में कांशीराम यूथ स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना का एलान किया है. ये काफी दिलचस्प घोषणा है.

केजरीवाल रोपड़ और इसके आसपास के इलाकें का दो बार दौरा कर चुके हैं. रोपड़ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम का इलाका है.

राज्य में दलितों का 32 फ़ीसद वोट है जो देश के किसी भी राज्य की तुलना में प्रतिशत के हिसाब से सबसे अधिक है.

इस आबादी की ख़ासी संख्या दोआब इलाक़े में है. विशेषज्ञों के मुताबिक़ यहां कांशीराम यूथ स्किल यूनिवर्सिटी खोलने का वादा दलितों के वोट को ध्यान में रखते हुए किया गया है.

पार्टी ने पंजाब में अनुसूचित जाति की इकाई पहले ही खोल दी थी जो इस समुदाय के संपर्क में भी है.

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